National Park and Wildlife Sanctuary of Madhya Pradesh राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्य
Madhya Pradesh GK

National Park of Madhya Pradesh राष्ट्रीय उद्यान

National Park and Wildlife Sanctuary of Madhya Pradesh

राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्य

राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्य

  • भारत में वर्ष 1972 में वन्य जीव अधिनियम पारित किया गया, जिसके अन्तर्गत राष्ट्रीय उद्यानों तथा वन्य प्राणी अभ्यारण्यों की स्थापना की गयी।
  • मध्य प्रदेश में दुर्लभ प्रजाति के जीवों के संरक्षण हेतु वर्ष 1974 में वन्य जीव संरक्षण अधिनियम पारित किया गया।
  • भारत में राष्ट्रीय उद्यान अधिनियम वर्ष 1952 में लागू किया गया।
  • मध्य प्रदेश में 11 राष्ट्रीय उद्यान तथा 26 अभ्यारण्य स्थापित किए गए हैं, जिनमें
  • 7 टाइगर रिजर्व,
  • 2 खरमौर अभ्यारण्य,
  • 2 सोन चिड़िया अभ्यारण्य,
  • 3 घड़ियाल ( एवं अन्य जलीय जीव) अभ्यारण्य तथा
  • 2 राष्ट्रीय उद्यान जीवाश्म संरक्षण हेतु स्थापित किये गए हैं।
  • 5 अभ्यारण्य वर्तमान में प्रस्तावित हैं।
  • मध्य प्रदेश में सभी राष्ट्रीय उद्यानों एवं अभ्यारण्यों का कुल क्षेत्रफल 10.99 हजार वर्ग किमी. है, जिनमें वन क्षेत्र का विस्तार 9. 12 हजार वर्ग किमी. है।
  • 1 नवंबर, 1981 को मध्य प्रदेश की रजत जयंती के अवसर पर बारहसिंगा को राज्य वन्य प्राणी (राज्य पशु) घोषित किया गया।
  • 26 सितम्बर, 2011 में महाशीर मछली (Tor Tor) को राज्य में संरक्षण प्रदान किया गया। वर्ष 2012 में आई. यू. सी.एन द्वारा विलुप्त घोषित किया गया है।
  • मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग को लोनली प्लैनेट द्वारा 9 मई, 2016 को सर्वश्रेष्ठ वन्य जीव अवार्ड प्रदान किया गया।
  • वर्ष 1981 में मध्य प्रदेश सरकार ने दूधराज ( शाह-ए- बुलबुल) को राजकीय पक्षी घोषित किया। इसे महारानी, हुसैनी बुलबुल व पैराडाइज फ्लाइकेचर के नाम से भी जाना जाता है।
  • थिका पक्षी ( पपीहा जैसा दिखने वाला शिकारी पक्षी) मध्य प्रदेश में सर्वाधिक संख्या में पाया जाता है।

प्रोजेक्ट टाइगर

  • विश्व में टाइगर प्रोजेक्ट के जन्मदाता गेनी मेनफोर्ड हैं, जबकि भारत में प्रोजेक्ट टाइगर के जन्मदाता कैलाश सांखला को माना जाता है।
  • वर्ष 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में बाघों की संख्या 785 है। इस रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश सर्वाधिक बाघों वाला राज्य है।
  • प्रति वर्ष 29 जुलाई को बाघ दिवस मनाया जाता है।
  • वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम, 1972 के अन्तर्गत वर्ष 1997 से प्रदेश के सभी टाइगर प्रोजेक्ट्स में टाइगर फाउण्डेशन सोसायटी की स्थापना की गई है।
  • राष्ट्रीय स्तर पर बाघों के संरक्षण हेतु प्रोजेक्ट टाइगर योजना 1 अप्रैल, 1973 से लागू की गई थी।
  • मध्य प्रदेश में वर्ष 1974 में सर्वप्रथम कान्हा किसली राष्ट्रीय उद्यान में प्रोजेक्ट टाइगर का प्रारम्भ किया गया था।
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    वर्ष 1971 में सर्वप्रथम मध्य प्रदेश के वनों में शिकार करने पर प्रतिबंध लगाया गया तथा 24 अक्टूबर, 1989 को अधिसूचना जारी कर वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम के अन्तर्गत सभी प्रकार के वन्य प्राणियों एवं पक्षियों का शिकार पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया गया है।

  • मध्य प्रदेश में 6 राष्ट्रीय उद्यानों के अतिरिक्त, रायसेन स्थित रातापानी अभ्यारण्य भी प्रोजेक्ट टाइगर के अन्तर्गत सम्मिलित है।
  • मध्य प्रदेश में प्रोजेक्ट टाइगर का विस्तार
  1. कान्हा किसली
  2. बाँधवगढ़
  3. पेंच
  4. पन्ना
  5. सतपुड़ा
  6. संजय गाँधी
  7. रातापानी अभ्यारण्य
Tiger Reserve Year Location Population
1. Kanha 1973–74 Madhya Pradesh 129
2. Pench 1992–93 Madhya Pradesh 123
3. Bandhavgarh 1993–94 Madhya Pradesh 165
4. Panna 1994–95 Madhya Pradesh 64
5. Satpura 1999–2000 Madhya Pradesh 62
6. Sanjay Dhubri 2008–09 Madhya Pradesh 20
7. Veerangana Durgavati 2023 Madhya Pradesh NA
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राष्ट्रीय उद्यान (National Park)

Name Location Formed
1. Bandhavgarh National Park District Umaria 1968
2. Dinosaur Fossil National Park 2011
3. Ghughua Fossil National Park Dindori district 1983
4. Kanha National Park Mandla district Balaghat district 1955
5. Kuno National Park Sheopur & Morena 2018
6. Madhav National Park Shivpuri 1959
7. Panna National Park Panna District 1981
8. Pench National Park 1975
9. Sanjay National Park 1981
10. Satpura National Park Narmadapuram 1981
11. Van Vihar National Park Bhopal district 1979
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National Park and Wildlife Sanctuary of Madhya Pradesh राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्य

(1) कान्हा किसली राष्ट्रीय उद्यान

  • यह मण्डला और बालाघाट जिले में 940 वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत है।
  • वर्ष 1879 में इसे वन आरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था।
  • वर्ष 1897 से 1910 तक यह अग्रेजों का शिकार स्थल था।
  • इसे वर्ष 1933 में अभय वन, 1952 में अभ्यारण्य तथा 1 जून, 1955 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया। इसे वर्ष 1974 में प्रोजेक्ट टाइगर के अन्तर्गत शामिल किया गया।
  • यह प्रदेश का प्रथम अभ्यारण्य, प्रथम उद्यान व प्रोजेक्ट टाइगर के अन्तर्गत शामिल प्रथम उद्यान है।
  • कान्हा राष्ट्रीय उद्यान भारत का प्रथम टाइगर रिजर्व है, जिसने वर्ष 2017 में अपना शुभंकर भूरसिंग द बारहसिंघा जारी किया है।
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    National Park and Wildlife Sanctuary of Madhya Pradesh राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्य

    इसका डिजाइन रोहन चक्रवर्ती द्वारा बनाया गया है।

  • कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के अन्तर्गत वर्ष 1963-65 में प्रसिद्ध वन्यजीव विशेषज्ञ जॉर्ज स्कॉलर ने वन्य जीव संरक्षण पर कार्य किया था, जिसका उल्लेख जेम्स फोर्सिथ ने अपनी पुस्तक सेन्ट्रल इण्डिया हाई लैण्डस (1860 ) में किया है।
  • यहाँ बाघों की सर्वाधिक संख्या पाई जाती है ।
  • यहाँ हॉलो व बंजर घाटी स्थित हैं।
  • ब्रांडेर ने अपनी पुस्तक वाइल्ड एनीमल इन सेन्ट्रल इंडिया में बंजर घाटी का वर्णन किया है।
  • कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में स्थित बामनी दरार को सूर्यास्त पॉइंट ( Sunset Point) के रूप में जाना जाता है, जो कान्हा राष्ट्रीय उद्यान का सबसे ऊँचा क्षेत्र है, यहाँ बंजर व सुपर्ण नदियाँ प्रवाहित होती हैं।
  • कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में निवासित बैगा जनजाति को भारतीय उपमहाद्वीप की प्राचीनतम जनजाति के रूप में जाना जाता है।
  • इस राष्ट्रीय उद्यान में बैगा मंगलू के नाम पर सड़क का निर्माण भी किया गया है।
  • यहाँ कृष्ण मृग (काला हिरण ) तथा ब्रेडरी प्रजाति का बारहसिंगा पाया जाता है। इस राष्ट्रीय उद्यान में पाये जाने वाले दुर्लभ बारहसिंगा को कान्हा का गहना भी कहा जाता है।
  • इसके अतिरिक्त, इस राष्ट्रीय उद्यान में शेर, चीतल, छुटरी, नीलगाय, जंगली कुत्ते, सुअर, तेन्दुआ, बारहसिंगा, सांभर ( श्याम मृग), कृष्णमृग, विशालकाय गौर पक्षी तथा सुन्दर चिड़िया (बामसन) आदि वन्य जीव पाये जाते हैं।
  • कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में उष्ण कटिबंधीय और शुष्क पर्णपाती वन पाये जाते हैं ।
  • यहाँ का सबसे लोकप्रिय वृक्ष इंडियन घोस्ट ट्री ( कुल्लु ) भी पर्णपाती क्षेत्र में पाया जाता है।
  • कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में साल के दो ठूंठ (बिना शाखा वाले) वृक्ष हैं, जिन्हें राजा-रानी के नाम से जाना जाता है।
  • कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में एक पौराणिक श्रवण ताल मण्डला जिले में स्थित है।
  • इसमें लप्सी नामक प्रसिद्ध शिकारी का स्मारक निर्मित किया गया है।
  • वर्ष 1999 में इसे सर्वश्रेष्ठ पर्यटन का पुरस्कार प्रदान किया गया था।
  • यह प्रदेश का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान है, जिसमें हवाई पट्टी स्थित है।
  • विश्व बैंक की सहायता से इस उद्यान में पार्क इंटरप्रेटेशन (Park Interpretation) योजना प्रारम्भ की गई।
  • वर्ष 2018 में कान्हा राष्ट्रीय उद्यान से बाघ ओडिशा के सतकोसिया टाइगर रिजर्वनौरादेही अभ्यारण्य (सागर) में पुनर्वासित किये गए हैं।

(2) राष्ट्रीय जीवाश्म उद्यान

  • यह डिंडोरी जिले के शाहपुरा विकासखण्ड में स्थित है।
  • इसकी स्थापना वर्ष 1983 में की गई थी। इसका क्षेत्रफल 0.27 वर्ग किमी. है।
  • इस राष्ट्रीय उद्यान का विस्तार कान्हा राष्ट्रीय उद्यान और बाँधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान के मध्य है।
  • यह प्रदेश का प्रथम जीवाश्म उद्यान तथा सबसे छोटा राष्ट्रीय उद्यान है।
  • राष्ट्रीय जीवाश्म उद्यान में पौधों, फलों, पत्तों, बीजों, मछलियों, नारियल एवं सुपाड़ी के जीवाश्म संरक्षित किए गए हैं, जो लगभग 65 लाख वर्ष पुराने हैं।
  • यह उद्यान नीलगिरि जीवाश्म के लिए जाना जाता है, जो अब तक खोजा गया सबसे प्राचीन जीवाश्म है।
  • राष्ट्रीय उद्यान जीवाश्म में मुख्यतः पाम जीवाश्म व डायनासोर के अण्डों के जीवाश्म पाये गए हैं।
  • इस राष्ट्रीय उद्यान का प्रमुख स्थान घुघवा है, जो 6.84 एकड़ क्षेत्र में विस्तृत है तथा इसमें हायफेनेड जीवाश्म पाया गया है।

(3) बाँधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान

  • बाँधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान विंध्य पर्वत माला के पूर्वी भाग के उमरिया जिले में स्थित है, जिसकी स्थापना वर्ष 1968 में की गई थी।
  • इसे वर्ष 1993-94 में टाइगर प्रोजेक्ट के अन्तर्गत सम्मिलित किया गया। इसका कुल क्षेत्रफल 437 वर्ग किमी. है।
  • यह राष्ट्रीय उद्यान 32 पहाड़ियों से घिरा हुआ है तथा इसके मध्य में 2000 वर्ष पुराना बाँधवगढ़ का किला स्थित है।
  • इसके मध्य से चरण गंगा नदी प्रवाहित होती है।
  • बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान बंगाल टाइगर के लिए प्रसिद्ध है। इसके अतिरिक्त, यहाँ सफेद शेर, साँभर, भालू, तेन्दुआ, नीलगाय, चीतल, हिरण आदि वन्य जीव पाए जाते हैं।
  • इस राष्ट्रीय उद्यान में सर्वाधिक बाघ घनत्व पाया जाता है, जिसके कारण इसकी तुलना रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान से की जाती है।
  • बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान में चार्जर ( नर बाघ) व सीता ( मादा बाघ) सर्वाधिक प्रसिद्ध बाघ थे।
  • इस उद्यान में चार्जर बाघ के नाम पर चार्जर पाइंट भी निर्मित किया गया है।
  • नेशनल ज्योग्राफिक मैगजीन के कवर पृष्ठ पर सीता बाघिन को प्रदर्शित किया गया है। इस राष्ट्रीय उद्यान की पहाड़ी पर कबीर चौरा नामक स्थान है, जो पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र है।
  • इस राष्ट्रीय उद्यान में गौर पुनर्वास योजना संचालित की जा रही है तथा इसे हाथियों के निवास स्थान के रूप में विकसित किया जा रहा है।
  • वर्ष 2018 में बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान से सुन्दरी बाघिन को ओडिशा के सतकोसिया टाइगर रिजर्व में पुनर्वासित किया गया है।

(4) पन्ना राष्ट्रीय उद्यान

  • पन्ना राष्ट्रीय उद्यान उत्तरी विंध्य पहाड़ियों के मध्य पन्ना एवं छतरपुर जिले तक विस्तृत है, जिसकी स्थापना वर्ष 1981 में की गई थी। इसका क्षेत्रफल 542.662 वर्ग किमी. है।
  • इस उद्यान को प्रोजेक्ट टाइगर के रूप में वर्ष 1994 में सम्मिलित किया गया ।
  • पन्ना राष्ट्रीय उद्यान को भारत के दूसरे सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान के रूप में जाना जाता है।
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    National Park and Wildlife Sanctuary of Madhya Pradesh राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्य

    भौगोलिक रूप से यह राष्ट्रीय उद्यान तीन भागों में विभक्त है –

  • ऊपरी तलगाँव पठार
  • मध्य हिनौता पठार
  • केन नदी पठार
  • इस राष्ट्रीय उद्यान में केन नदी उत्तर दिशा से प्रवाहित होती है, जिसे इस राष्ट्रीय उद्यान की जीवन रेखा भी कहते हैं।
  • इस राष्ट्रीय उद्यान में प्रमुख रूप से बाघ, तेन्दुआ, सांभर, चीतल, चिंकारा, भालू व जंगली भैंसा आदि वन्य जीव पाये जाते हैं।
  • इस उद्यान में उष्णकटिबंधीय, सागौन वन और उत्तर उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन पाये जाते हैं।
  • पन्ना राष्ट्रीय उद्यान में विश्व बैंक की सहायता से विश्व वन्य जीव कोष एवं 25 अगस्त 2011 को प्रदेश के तीसरे जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र की स्थापना की गई है।
  • पन्ना राष्ट्रीय उद्यान में वर्ष 2017 में गिद्धों की गणना, कार्बनिक आयन ट्रांसपोर्टर (AOP) तकनीक से की गई, जिसके आधार पर कुल गिद्धों की संख्या लगभग 1,676 है।
  • यह प्रदेश का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान है, जहाँ खजुराहो पर्यटन स्थल से नियमित विमान सेवा उपलब्ध है।
  • केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के कारण इस राष्ट्रीय उद्यान का लगभग 30 वर्ग किमी. क्षेत्रफल डूब गया है।
  • पन्ना राष्ट्रीय उद्यान में पर्यावरण समन्वय एवं संगठन बोर्ड, भोपाल की शाखा स्वीकृत है।
  • यह राष्ट्रीय उद्यान आँवला उत्पादन, रेप्टाइल पार्क व जंगली भैसा (संरक्षण) के लिए प्रसिद्ध है।
  • पन्ना राष्ट्रीय उद्यान के अन्तर्गत
  • केन घड़ियाल वन्य जीव अभ्यारण्य और
  • पांडव जल प्रपात एवं
  • गाथा जल प्रपात स्थित हैं।
  • पन्ना टाइगर रिजर्व को वर्ष 2016-2017 में विश्व प्रसिद्ध वेबसाइट ट्रिप एडवाइजर के द्वारा अवार्ड आफ एक्सीलेंस पुरस्कार प्रदान किया गया है।

(5) पेंच राष्ट्रीय उद्यान

  • पेंच राष्ट्रीय उद्यान सतपुड़ा पहाड़ियों के दक्षिणी भाग सिवनी – छिन्दवाड़ा जिले में स्थित है।
  • वर्ष 1977 में 449.39 वर्ग किमी. वन क्षेत्र को पेंच अभ्यारण्य घोषित किया गया था, जिसके 292.850 वर्ग किमी. क्षेत्र को वर्ष 1983 में पेंच राष्ट्रीय उद्यान बनाया गया।
  • इसे वर्ष 1992 में देश के 19वाँ टाइगर प्रोजेक्ट के अन्तर्गत सम्मिलित किया गया।
  • वर्ष 2002 में इसका नाम परिवर्तित कर इन्दिरा गाँधी प्रियदर्शनी राष्ट्रीय उद्यान एवं पेंच मोगली अभ्यारण्य कर दिया गया।
  • यह राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित है।
  • यहाँ सर्वाधिक काले हिरण तथा बाघ, तेन्दुआ, सांभर, चीतल, गौर, हिरण, नीलगाय, जंगली सुअर आदि वन्य जीव पाये जाते हैं।
  • पेंच राष्ट्रीय उद्यान से पेंच नदी उत्तर से दक्षिण की ओर प्रवाहित होती है।
  • इसी नदी पर तोतलाडोह बाँध (निर्माणकाल 1973 – 88 ) का निर्माण किया गया है। इस राष्ट्रीय उद्यान से होकर राष्ट्रीय राजमार्ग – 44 गुजरता है।
  • पेंच राष्ट्रीय उद्यान में सबसे चर्चित स्थल काला पहाड़ स्थित है, जिसकी समुद्र तल से ऊँचाई 650 मी. है।
  • पेंच राष्ट्रीय उद्यान पर रुडयार्ड किपलिंग ने द जंगल बुक नामक प्रसिद्ध पुस्तक लिखी है।
  • पेंच राष्ट्रीय उद्यान में मोगली लैंड विकसित किया गया है, जहाँ पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2004 से मोगलीलैंड उत्सव आयोजित किया जाता है।

(6) माधव राष्ट्रीय उद्यान

  • माधव राष्ट्रीय उद्यान वर्ष 1958 में मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थापित किया गया था, जो 375.230 वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत है।
  • यहाँ सर्वाधिक वन घनत्व पाया जाता है।
  • स्वतंत्रता के पूर्व यह राष्ट्रीय उद्यान सिंधिया राजवंश का शिकार स्थल था तथा जिन्होंने इस राष्ट्रीय उद्यान में मनिहार नदी पर सांख्य सागर व जाधव सांगर आदि झीलों का निर्माण कराया गया था।
  • सांख्य सागर झील मगरमच्छ सफारी के लिए प्रसिद्ध है।
  • माधव राष्ट्रीय उद्यान से बरही नदी प्रवाहित होती है ।
  • यहाँ ऊष्ण कटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन, मिश्रित वन, धावड़ा एवं सलाई वन पाये जाते हैं।
  • माधव राष्ट्रीय उद्यान से NH-3 ( आगरा – मुम्बई ) NH1-25 ( शिवपुरी – झांसी) गुजरते हैं ।
  • यहाँ पर जॉर्ज कैसल नामक भवन तथा भदैया कुण्ड, सुर्भला की गरही एवं तात्या टोपे की समाधि स्थित है।

(7) संजय गाँधी राष्ट्रीय उद्यान

  • संजय गाँधी राष्ट्रीय उद्यान वर्ष 1983 में मध्य प्रदेश के सीधी व सिंगरौली जिले में स्थापित किया गया था जो 466. 66 वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत है।
  • इस उद्यान को वर्ष 2008 में टाइगर प्रोजेक्ट के अन्तर्गत सम्मिलित किया गया था।
  • यह अविभाजित मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान था।
  • इस राष्ट्रीय उद्यान में सर्वाधिक चीतल और इसके अतिरिक्त यहाँ तेन्दुआ, सांभर, भालू आदि वन्य जीव पाये जाते हैं।
  • इसके समीप
  • डुबरी अभ्यारण्य,
  • बगदरा अभ्यारण्य तथा
  • सोनघड़ियाल अभ्यारण्य का भी निर्माण हुआ है।
  • संजय गाँधी राष्ट्रीय उद्यान
  • सोन,
  • गोपद,
  • बनास, एवं
  • कोरमार नदियों के जल संग्रहण क्षेत्र के अन्तर्गत आता है ।
  • इस राष्ट्रीय उद्यान में 80% साल वन तथा 20% मिश्रित वन पाये जाते हैं।
  • संजय गाँधी राष्ट्रीय उद्यान में भुईमाड़ गुफा, राजगढ़ी गिद्धा पहाड़, बरचर बाँध, ठोंगा मन्दिर, रमदहा कुण्ड, कन्हैयादह (साथा जल प्रपात) आदि दर्शनीय एवं रमणीय स्थल स्थित हैं।
  • Biodiversity Concept And Its Threat Assessment Vindhyan Region पुस्तक में इस राष्ट्रीय उद्यान की जैव विविधता का वर्णन किया गया है।
  • इस राष्ट्रीय उद्यान के अन्तर्गत मड़वास के समीप भरतरी वन क्षेत्र से सफेद बाघ मोहन को 28 मई, 1951 में रीवा के तत्कालीन महाराजा मार्तण्ड सिंह ने पकड़ा था।

(8) सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान

  • सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान होशंगाबाद जिले में वर्ष 1981 में स्थापित किया गया था जिसका कुल क्षेत्रफल 528.729 वर्ग किमी. है।
  • वर्ष 1999 में इसे प्रोजेक्ट टाइगर के अन्तर्गत सम्मिलित किया गया।
  • इस उद्यान में कृष्णमृगों की सर्वाधिक संख्या पायी जाती
  • यह राष्ट्रीय उद्यान पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें मुख्यत: इंडियन बाइसन (गौर) पक्षी पाया जाता है।
  • सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान में प्रमुख रूप से पाए जाने वाले वन्य जीव बाघ, तेन्दुआ, गौर, चीतल, सांभर, भालू, मुजक, हिरण एवं नीलगाय आदि हैं।
  • यहाँ पर मुख्यतः साल, बाँस व सागौन के वृक्ष पाये जाते हैं।
  • सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान में निम्नलिखित वन पाए जाते हैं-

1. दक्षिण भारतीय आर्द्र सागौन वन

2. दक्षिण भारतीय अल्प आर्द्र सागौन वन

3. दक्षिण भारतीय आर्द्र मिश्रित सागौन वन

4. दक्षिण उष्ण कटिबंधीय शुष्क सागौन वन

5. दक्षिण उष्ण कटिबंधीय शुष्क मिश्रित पर्णपाती वन

6. शुष्क प्रायद्वीपीय साल वन

7. केंद्रीय भारतीय उप उष्ण कटिबंधीय पहाड़ी वन ।

  • सतपुड़ा टाइगर रिजर्व प्रमुख रूप से तवा जलाशय का जल संग्रहण क्षेत्र है। यह मध्य भूमि के हाई लैण्ड इको सिस्टम का उष्कृष्ट उदाहरण है।
  • सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के अन्तर्गत 4926.28 वर्ग किमी. क्षेत्रफल पर वर्ष 1999 में प्रदेश का प्रथम बायोस्फीयर ( पचमढ़ी) घोषित किया गया।
  • सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान से प्रवाहित होने वाली तवा और देनवा नदियों के संगम पर मढ़ई पर्यटन स्थल स्थित है। इसके अतिरिक्त यहाँ पचमढ़ी व चूरना पर्यटन क्षेत्र भी स्थित हैं।
  • यह प्रदेश का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान है, जिसमें प्रशासनिक तौर पर बस, जीप, हाथी, डोंगी एवं नाव आदि चलाने की अनुमति है।
  • सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान में मध्य प्रदेश की सबसे ऊँची चोटी धूपगढ़ (1,350 मीटर) स्थित है।

ओंकारेश्वर राष्ट्रीय उद्यान

  • यह निवाड़ क्षेत्र में स्थापित होने वाला प्रथम राष्ट्रीय उद्यान है ।
  • यह खण्डवा जिले में वर्ष 2004 से निर्माणाधीन है। इसका कुल क्षेत्रफल 651 वर्ग किमी. है।

(9) डायनासौर राष्ट्रीय उद्यान

  • यह प्रदेश का दूसरा बड़ा जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान है जो धार जिले में बाघ और जोबट नदी के तट पर 2 दिसम्बर, 2010 को स्थापित किया गया।
  • उसे वर्ष 2011 में डायनासोर जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान के रूप में अधिसूचित किया गया। इसका कुल क्षेत्रफल 89.740 हेक्टेयर है।
  • डायनासोर राष्ट्रीय उद्यान में 19 सितम्बर, 2015 में बाघ नदी के किनारे 6.5 करोड़ वर्ष पुराने डायनासोर के जीवाश्म (पद चिह्न) प्राप्त हुए हैं।

(10) वन – विहार राष्ट्रीय उद्यान

  • यह वर्ष 1979 में भोपाल में स्थापित किया गया था, जिसका कुल क्षेत्रफल 4.45 वर्ग किमी. है। इसे 26 जनवरी, 1983 को राष्ट्रीय उद्यान घोषित कर वन विहार नाम प्रदान किया गया।
  • वन-विहार राष्ट्रीय उद्यान में मध्य प्रदेश का एकमात्र सर्प उद्यान तथा आई.एस.ओ. प्रमाणित आधुनिक चिड़ियाघर स्थापित है, जिसे केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से मध्यम चिड़ियाघर की मान्यता प्राप्त है।
  • इस राष्ट्रीय उद्यान में वर्ष 2008 से वन जीवों को गोद लेने की प्रथा प्रारम्भ की गई तथा विहार वीथिका और प्रकृति व्याख्या केंद्र की भी स्थापना की गई।
  • वन विहार मे मध्य प्रदेश का एकमात्र सर्वसुविधा सम्पन्न रेस्क्यू सेंटर स्थापित किया गया है, जिसमें विभिन्न प्रकार के वन्य प्राणियों को संरक्षण व चिकित्सीय सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं।
  • वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में चीकू द्वार पर राजा भोज झील के किनारे काष्ठ निर्मित कैफेटेरिया आकर्षण का प्रमुख केन्द्र है।
  • इस राष्ट्रीय उद्यान में शुष्क पर्णपाती विरल वन तथा अनेक किस्मों की घास पाई जाती है।

(11) कूनो राष्ट्रीय उद्यान

  • इसकी स्थापना पालपुर कूनो अभ्यारण्य के रूप में वर्ष 1981 में श्योपुर जिले में की गई थी ।
  • यहाँ से कूनो नदी प्रवाहित होती है।
  • दिसम्बर, 2018 में इस अभ्यारण्य को राष्ट्रीय उद्यान दर्जा प्रदान किया गया है। इसके पूर्ववर्ती क्षेत्रफल 344.686 वर्ग किमी. में 404 वर्ग किमी. अतिरिक्त क्षेत्र जोड़ा गया है।
  • इस राष्ट्रीय उद्यान में मुख्यतः बाघ, तेंदुआ, चीतल, सांभर, नीलगाय, चिंकारा आदि वन्य प्राणी तथा धावड़ा, महुआ, सलैया, पलाश तथा बेर आदि वृक्ष पाए जाते हैं।
  • अब यहाँ गुजरात के गिर राष्ट्रीय उद्यान से एशियाई शेरों को पुनर्वासित किया जाएगा।

Noted Point-

जंगल गलियारा योजना

  • पेंच, बाँधवगढ़, कान्हा किसली, सतपुड़ा, पन्ना राष्ट्रीय उद्यान को जोड़कर जंगल गलियारा योजना बनायी जा रही है।

मध्य प्रदेश के अभ्यारण्य (Sanctuary of Madhya Pradesh)

  • वन्य जीव अभ्यारण्य (Wild Life Sanctuaries) का गठन किसी एक प्रजाति अथवा कुछ विशिष्ट प्रजातियों के संरक्षण के लिए किया जाता है अर्थात् ये संरक्षित क्षेत्र विशिष्ट प्रजाति आधारित होते हैं।
  • प्रदेश का प्रथम अभयारण्य कान्हा किसली वर्ष 1933 में स्थापित किया गया था।
  • वर्तमान में प्रदेश में कुल 31 अभ्यारण्य स्थापित हैं।
  1. Bori Wildlife Sanctuary, 1977
  2. Gandhi Sagar Sanctuary, 1974
  3. Nauradehi Wildlife Sanctuary, 1975
  4. National Chambal Sanctuary, 1979
  5. Ghatigaon Wildlife Sanctuary, 1981
  6. Karera Wildlife Sanctuary, 1981
  7. Ken Gharial Sanctuary, 1981
  8. Ralamandal Wildlife Sanctuary, 1989
  9. Kheoni Sanctuary
  10. Narsinghgarh Wildlife Sanctuary
  11. Bagdara Wildlife Sanctuary
  12. Orcha Wildlife Sanctuary
  13. Panpatha Wildlife Sanctuary
  14. Phen Wildlife Sanctuary
  15. Sailana Wildlife Sanctuary
  16. Sardarpur Wildlife Sanctuary,1983
  17. Singhori Wildlife Sanctuary
  18. Son Gharial Sanctuary
  19. Veerangana Durgavati Wildlife Sanctuary, 1996
  20. Pachmarhi wildlife Sanctuary
  21. kuno wildlife sanctuary
  22. Ratapani Wildlife sanctuary
  23. sanjay-dubri wildlife sanctuary
  24. Gangau wildlife saanctuary
National Park and Wildlife Sanctuary of Madhya Pradeshराष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्य
National Park and Wildlife Sanctuary of Madhya Pradesh राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्य

नौरादेही अभ्यारण्य Nauradehi Wildlife Sanctuary, 1975

  • नौरादेही अभ्यारण्य की स्थापना वर्ष 1975 में सागर जिले में की गई, जिसका कुल क्षेत्रफल 1197.04 वर्ग किमी. है
  • यह प्रदेश का सबसे बड़ा अभ्यारण्य है, जो नर्मदा का कछारी क्षेत्र है।
  • इस अभ्यारण्य में बाघ, सांभर, नीलगाय, चिंकारा एवं जंगली भैसा आदि वन्य जीव पाए जाते हैं।
  • नौरादेही अभ्यारण्य में अफ्रीकी चीता को पुनर्वासित करने की योजना संचालित की जा रही है तथा वर्ष 2018 में यहाँ कान्हा राष्ट्रीय उद्यान से बाघ और शेर लाकर पुनर्वासित किए जाने की योजना प्रस्तावित है।

राला मण्डल अभ्यारण्य Ralamandal Wildlife Sanctuary, 1989

  • राला मण्डल अभ्यारण्य वर्ष 1989 में इन्दौर में स्थापित किया गया था, जो 234 वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत है।
  • यह देश का प्रथम लोमड़ी संरक्षण केन्द्र (वर्ष 2017 ) तथा प्रदेश का सबसे छोटा अभ्यारण्य है।
  • इस अभ्यारण्य में मुख्यत: बाघ, तेंदुआ, चीतल, सांभर, गौर, भालू आदि वन्य प्राणी तथा सागौन, चंदन, बबूल और बाँस आदि वृक्ष पाये जाते हैं।
  • वर्ष 2017-18 में राला मण्डल अभ्यारण्य में प्रदेश का दूसरा तितली पार्क एवं बेंबू सेटम नामक बाँस प्रोडक्शन प्रोजेक्ट स्थापित किया जा रहा है।

सरदारपुर अभ्यारण्य Sardarpur Wildlife Sanctuary,1983

  • सरदारपुर अभयारण्य वर्ष 1983 में खरमौर पक्षी के संरक्षण व संवर्द्धन के लिए धार जिले में स्थापित किया गया था जो 348.121 वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत है।
  • वर्ष 2005 से यहाँ पर दूधराज, सुल्ताना बुलबुल या खड़तीतर को संरक्षण प्रदान किया जा रहा है।
  • सिरपुर तालाब (इंदौर) को वर्ष 2012 में पक्षी विहार के रूप में निर्मित करने का निर्णय लिया गया।

सैलाना अभ्यारण्य Sailana Wildlife Sanctuary 1983

  • सैलाना अभ्यारण्य वर्ष 1983 में रतलाम जिले में स्थापित किया गया, जो 965 वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत है।
  • यह अभ्यारण्य खरमोर या दूधराज, सुल्ताना बुलबुल, खड़तीतर और पैराडाइज फ्लाईकेचर के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है।
  • प्रसिद्ध पक्षी विशेषज्ञ सलीम अली ने इस अभ्यारण्य में पायी जाने वाली 89 पक्षियों की प्रजातियों पर आधारित पुस्तक का लेखन भी किया है।
  • यह अभ्यारण्य काठियावाड़ – गिर के सूखे पर्णपाती जंगलों के इकोर्जियन के एक भाग के रूप में जाना जाता है।
National Park and Wildlife Sanctuary of Madhya Pradeshराष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्य
National Park and Wildlife Sanctuary of Madhya Pradesh राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्य

घाटीगाँव अभ्यारण्य Ghatigaon Wildlife Sanctuary, 1981

  • घाटीगाँव अभ्यारण्य की स्थापना वर्ष 1981 में ग्वालियर जिले में की गई जो 510.640 वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत है ।
  • यह सिंधिया और तोमर राजवंश का शिकार क्षेत्र रहा है ।
  • इस अभ्यारण्य में शाह – ए – बुलबुल / सोन चिड़िया को भी संरक्षण प्रदान किया गया है।
  • यहाँ पर चिंकारा, सांभर एवं नीलगाय वन्य प्राणी तथा खैर, पलाश, धावड़ा तथा धामन आदि के वृक्ष पाये जाते हैं।

करेरा अभ्यारण्य Karera Wildlife Sanctuary, 1981

  • करेरा अभ्यारण्य की स्थापना वर्ष 1981 में शिवपुरी जिले में की गई, जो 202.210 वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत इस अभ्यारण्य से महुअर व बघेदरी नदियाँ प्रवाहित होती हैं।
  • इस अभ्यारण्य में प्रमुख रूप से सोन चिड़िया (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) को संरक्षण प्रदान किया गया है।
  • इसके अतिरिक्त यहाँ सांभर, चीतल, चिंकारा, भारतीय उल्लू, नीलगाय आदि वन्य प्राणियों को संरक्षण प्रदान किया जाता है।
National Park and Wildlife Sanctuary of Madhya Pradeshराष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्य
National Park and Wildlife Sanctuary of Madhya Pradesh राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्य

चम्बल अभ्यारण्य National Chambal Sanctuary, 1979

  • चम्बल अभयारण्य की स्थापना वर्ष 1978-79 में की गई थी।
  • यह प्रदेश का सबसे बड़ा घड़ियाल अभ्यारण्य है, जो मुरैना, भिण्ड, धौलपुर (राजस्थान) एवं इटावा (उ.प्र.) में विस्तृत है। इसका कुल क्षेत्रफल 435 वर्ग किमी. है।
  • इस अभयारण्य में प्रमुख रूप से डॉल्फिन का संरक्षण प्रदान किया जाता है।
  • यहाँ घड़ियाल, मगरमच्छ, कछुआ, ऊदबिलाव आदि वन्य प्राणी पाए जाते हैं।
  • इस अभयारण्य में बबूल, खैर, बाँस आदि वृक्ष पाए जाते हैं।
  • यहाँ वर्ष 2017 में कछुओं को भिण्ड के बटही घाट में संरक्षण दिया गया है।
  • 2 मार्च, 2020 को केन्द्र सराकार ने राष्ट्रीय चम्बल अभ्यारण्य को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया गया।

सोन घड़ियाल अभ्यारण्य Son Gharial Sanctuary 1981

  • मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में सोन नदी पर 23 सितम्बर, 1981 को सोन घड़ियाल अभ्यारण्य स्थापित किया गया था, जो सीधी, सतना एवं सिंगरौली जिलों की सीमा में 83.684 वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत है।
  • इसमें प्रमुख रूप से घड़ियाल, मगरमच्छ, कछुआ आदि प्राणी पाए जाते हैं यहाँ केचुए की सर्वाधिक प्राचीन प्रजाति पायी जाती है।

केन अभ्यारण्य Ken Gharial Sanctuary, 1981

  • केन अभ्यारण्य की स्थापना वर्ष 1981 में मध्य प्रदेश के छतरपुर, पन्ना जिले में की गई थी।
  • यह अभ्यारण्य कुल 45.201 वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत है।
  • इस अभ्यारण्य में घड़ियाल एवं मगरमच्छ को संरक्षण प्रदान किया जाता है।
  • वर्ष 2017 से यहाँ गिद्धों का संरक्षण भी प्रस्तावित है ।

खिवनी अभ्यारण्य Kheoni Sanctuary 1955

  • खिवनी अभ्यारण्य की स्थापना वर्ष 1955 में देवास जिले में की गई थी ।
  • यह अभ्यारण्य 143.778 वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत है।
  • इस अभ्यारण्य में तेंदुआ, चीतल, सांभर, नीलगाय एवं हिरण आदि वन्य प्राणियों को संरक्षण दिया गया है।
  • यहाँ सागौन, धावड़ा, खैर तथा शीशम के अतिरिक्त बाँस के वृक्ष पाये जाते हैं।
  • इस अभ्यारण्य से बाल गंगा नदी का उद्गम होता है, जिस पर शंकर खो-जामनेर जलप्रपात स्थित है।

नरसिंहगढ़ अभ्यारण्य Narsinghgarh Wildlife Sanctuary, 1974

  • नरसिंहगढ़ अभ्यारण्य की स्थापना वर्ष 1974 में राजगढ़ जिले में की गई थी, जो 57.190 वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत है।
  • यह अभ्यारण्य नरसिंहगढ़ व राजगढ़ स्टेट के राजाओं के शिकार के लिए आरक्षित था।
  • इस अभ्यारण्य में मुख्यतः बुलबुल, तेंदुआ, सांभर, चीतल, जंगली सुअर, मोर, मगरमच्छ आदि वन्य प्राणी तथा सागौन, धावड़ा, खैर, अर्जुन आदि के वृक्ष पाये जाते हैं।
  • नरसिंहगढ़ अभ्यारण्य से सोनार और पार्वती नदियाँ प्रवाहित होती हैं। इस अभ्यारण्य में चिड़ी खो झील स्थित है।

गौ अभ्यारण्य

  • यह आगर-मालवा के सुसनेर में देश तथा प्रदेश का पहला गौ अभ्यारण्य है।
  • इसकी स्थापना 24 दिसम्बर 2012 को की गई थी। इसका कुल क्षेत्रफल 472.63 वर्ग किमी. है।

गाँधी सागर अभ्यारण्य Gandhi Sagar Sanctuary, 1974

  • गाँधी सागर अभ्यारण्य की स्थापना वर्ष 1974 में नीमच और मन्दसौर जिले में की गई थी।
  • यह अभ्यारण्य 368. 620 वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत है।
  • चम्बल नदी गाँधी सागर अभ्यारण्य को दो भागों में विभाजित करती है।
  • यहाँ पर तेंदुआ, चीतल, चिंकारा, जल पक्षी, नील गाय और गिद्ध को संरक्षण प्रदान किया जाता है।

कालीभीत अभ्यारण्य kalibhit Sanctuary *

  • यह बैतूल जिले में स्थित है।
  • कालीभीत अभ्यारण्य को महाराष्ट्र के मेघराज अभ्यारण्य से जोड़कर बाघ गलियारा (Tiger Corridor) बनाने की योजना प्रस्तावित है।
  • इस अभयारण्य में काले भालू एवं चीते को संरक्षण प्रदान किया जाता है ।

दुर्गावती अभ्यारण्य Veerangana Durgavati Wildlife Sanctuary, 1996

  • दुर्गावती अभ्यारण्य की स्थापना वर्ष 1997 में दमोह जिले में की गई थी, जो 23.973 वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत है।
  • यहाँ पर सांभर, नीलगाय, भालू प्रमुख वन्य जीव तथा धावड़ा, साज, बीज, सागौन तथा पलाश आदि वृक्ष पाये जाते हैं।

सिंघौरी अभ्यारण्य Singhori Wildlife Sanctuary 1976

  • सिंघौरी अभ्यारण्य की स्थापना वर्ष 1976 में रायसेन जिले के अब्दुल्लागंज में की गई थी, जो 287.915 वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत है।
  • यहाँ पर पाये जाने वाले प्रमुख वन्य प्राणियों में बाघ, तेंदुआ, सांभर, चीतल, नीलगाय सम्मिलित वनस्पतियों में सागौन के वन प्रमुख हैं।
  • इस अभ्यारण्य में बरना बाँध स्थित है। यह अभ्यारण्य प्रागैतिहासिक महत्त्व के लिए प्रसिद्ध है।
  • इसमें मृगेन्द्रनाथ गुफा, जामवंती गुफा एवं चौकीगढ़ किला आदि प्रमुख दर्शनीय स्थल स्थित हैं।

पचमढ़ी अभ्यारण्य Pachmarhi wildlife Sanctuary 1977

  • यह अभ्यारण्य वर्ष 1977 में मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले में स्थापित किया गया, जो 491.63 वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत है।
  • केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 1999 में तथा यूनेस्को द्वारा वर्ष 2009 में इसे मध्य प्रदेश का प्रथम जैव आरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया।
  • इस अभ्यारण में सर्वाधिक कृष्ण मृग पाये जाते हैं। इसके अतिरिक्त यहाँ बाघ, तेन्दुआ, चीतल तथा सांभर आदि वन्य जीव भी पाए जाते हैं।

बोरी अभ्यारण्य Bori Wildlife Sanctuary, 1977

  • बोरी अभ्यारण्य की स्थापना वर्ष 1865 में होशंगाबाद जिले में की गई थी ।
  • यह अभ्यारण्य 485.715 वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत है।
  • इस अभ्यारण्य में स्थित वन क्षेत्र को भारत के सबसे पुराने जंगल के रूप में जाना जाता है।
  • यहाँ मुख्यतः बाघ, तेंदुआ, सांभर, चीतल, गौर, हिरण, जंगली सुअर आदि वन्य प्राणी तथा साल, सागौन, तेंदूपत्ता, बाँस इत्यादि वन पाये जाते हैं।
  • इस अभ्यारण्य में सबसे मोटे-तने वाले सागौन एवं साल वृक्ष तथा सबसे अच्छी प्रजाति वाले बाँस ड्रेन्डो – काम्स्ट्रिक्स (Dendro-Calmstrics) पाये जाते हैं।

मोगली – पेंच अभ्यारण्य Mogali pench Sanctuary 1983*

  • मोगली – पेंच अभ्यारण्य की स्थापना वर्ष 1983 में सिवनी – छिन्दवाड़ा जिले में की गई थी, जो 118.473 वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत है।
  • यहाँ बाघ, तेंदुआ, चीतल, सांभर, नीलगाय, जंगली मुर्गी, जंगली सुअर आदि वन्य प्राणी तथा साल, सागौन, जामुन, बाँस और तेंदूपत्ता के वृक्ष पाये जाते हैं।

फैन मिनीकोर अभ्यारण्य Phen Minicor Sanctuary 1983

  • फैन मिनीकोर अभ्यारण्य की स्थापना वर्ष 1983 में मण्डला जिले में की गई थी। यह अभ्यारण्य 110.740 वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत है।
  • यहाँ तेंदुआ, शेर, चीतल, सांभर, आदि वन्य प्राणी तथा साल, सागौन, तेंदू तथा बेल आदि के वृक्ष पाये जाते हैं।

पनपठा अभ्यारण्य Panpatha Wildlife Sanctuary, 1983

  • पनपठा अभ्यारण्य की स्थापना वर्ष 1983 में शहडोल- उमरिया जिले में की गई थी, जो 245.842 वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत है।
  • इस अभ्यारण्य में तेंदुआ, चीतल, सांभर, नीलगाय, हिरण वन्य प्राणी तथा साल, बाँस, तेंदूपत्ता, बीजा, खैर आदि के वृक्ष पाये जाते हैं।

ओरछा अभ्यारण्य Orcha Wildlife Sanctuary, 1994

  • ओरछा अभ्यारण्य की स्थापना वर्ष 1994 में टीकमगढ़ जिले में बेतवा नदी के किनारे की गई थी।
  • यह अभ्यारण्य 44.914 वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत है। इसे पक्षियों का अभ्यारण्य भी कहते हैं।
  • इस अभ्यारण्य तेंदुआ, जंगली सुअर, सांभर, चीतल, नीलगाय, चिंकारा आदि वन्य प्राणी पाए जाते हैं।

संजय गाँधी डुबरी अभ्यारण्य Sanjay-dubri wildlife sanctuary, 1975

  • संजय गाँधी डुबरी अभ्यारण्य की स्थापना वर्ष 1975 में सीधी जिले में की गई थी।
  • यह अभ्यारण्य 364.693 वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत है।
  • इस अभ्यारण्य से गोपद, बनास और सोन नदियाँ प्रवाहित होती हैं।
  • इस अभ्यारण्य में प्रमुख रूप से बाघ, चीतल, सांभर, तेंदुआ, नीलगाय तथा चिंकारा आदि वन्य प्राणी पाये जाते

बगदरा अभ्यारण्य Bagdara Wildlife Sanctuary

  • बगदरा अभ्यारण्य सीधी जिले में स्थापित है, जो 478 वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत है।
  • यहाँ पर तेंदुआ, चीतल, सांभर, चिंकारा, नीलगाय आदि वन्य प्राणी तथा तेंदूपत्ता, सागौन, खैर, धावड़ा आदि के वृक्ष पाये जाते हैं।

गंगऊ अभ्यारण्य Gangau wildlife sanctuary

  • यह पन्ना जिले में स्थित है जो 78.536 वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत है।
  • इस अभ्यारण्य में बाघ, तेंदुआ, सांभर, चीतल, चिंकारा आदि वन्य प्राणी तथा सागौन के वन पाए जाते हैं।
  • इस अभ्यारण्य में जंगली भैंसों को संरक्षण प्रदान किया गया है।

रातापानी अभ्यारण्य Ratapani Wildlife sanctuary

  • रातापानी अभ्यारण्य की स्थापना वर्ष 1976 में सीहोर एवं रायसेन जिले में की गई थी।
  • यह अभ्यारण्य 825.907 वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत है ।
  • रातापानी अभ्यारण्य से बेतवा नदी प्रवाहित होती है।
  • इस अभ्यारण्य में बाघ, तेन्दुआ, सांभर, चीतल तथा नीलगाय आदि वन्य प्राणी पाए जाते हैं।
  • यह प्रदेश का एकमात्र अभ्यारण्य है जिसे वर्ष 2014 में के अन्तर्गत सम्मिलित किया गया है।

Facts to know

टाइगर सफारी

  • वर्ष 2016 में मध्य प्रदेश के सतना जिले के मुकुंदपुर में महाराजा मार्तण्ड सिंह जूदेव व्हाइट टाइगर जू स्थापित किया गया था।
  • यह प्रदेश की प्रथम टाइगर सफारी है।
  • इस टाइगर सफारी में सर्वप्रथम विंध्या नामक सफेद बाघिन को वन विहार भोपाल से पुनर्वासित किया गया था।
  • वर्तमान में कानन पैड़री, बिलासपुर से तथा मैत्री बाग जू भिलाई से सोनम एवं गोपी नामक सफेद शेर पुनर्वासित किये गये हैं।

म.प्र के जैव मण्डल आरक्षित क्षेत्र

1. पचमढ़ी बायोस्फेयर रिजर्व – (1999) होशंगाबाद

  • National Park and Wildlife Sanctuary of Madhya Pradeshराष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्य
    National Park and Wildlife Sanctuary of Madhya Pradesh राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्य

    सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान एवं बोरी घाटी अभ्यारण शामिल है।

  • इसे 2009 में यूनेस्कों की सूची में शामिल किया गया ।
  • बड़ी गिलहरी एवं उड़ने वाली गिलहरी पाई जाती है।

2. अमरकंटक अचानकमार (2005) मध्यप्रदेश एवं छतीसगढ़

  • यहाँ पर सारस क्रेन पाए जाते हैं ।
  • इसे 2012 में यूनेस्कों की सूची में शामिल किया गया ।

3. पन्ना जैव मंडल आरक्षित क्षेत्र – (2011) पन्ना एवं छतरपुर

  • केन नदी बीचों-बीच से गुजरती है ।
  • इसके अंतर्गत गंगेऊ अभ्यारण्य, केन अभ्यारण्य व पन्ना राष्ट्रीय उद्यान शामिल है।
  • 2020 को पन्ना जैव मंडल को यूनेस्को की सूची में शामिल किया गया है ।
  • सबसे बड़ा अभ्यारण्य —– नौरादेही (सागर) इसका क्षेत्रफल 1197 वर्ग किमी. है,
  • सबसे छोटा अभ्यारण्य —- रालामण्डल (इंदौर) इसका क्षेत्रफल 2.340 वर्ग किमी. है।
  • मध्यप्रदेश का पहला वन्य जीव जागरूकता केन्द्र रालामांडल इन्दौर में स्थापित किया गया हैं ।
  • भारत का सबसे बड़ा घड़ियाल केन्द्र चम्बल (मुरैना) में है तथा यहाँ पर डॉल्फिन का संरक्षण भी किया जाता है ।
  • व्हाइट टाइगर सफारी मुकुंदपुर (सतना) में इसका उद्घाटन 3 अप्रैल 2016 को हुआ, यहाँ सफेद शेरों को बसाया गया है ।
  • राष्ट्रीय उद्यानों में सर्वाधिक संख्या में पाया जाने वाला पशु चीतल है ।
  • विश्व में प्रोजेक्ट टाइगर के जन्मदाता “गेनी मेनफोर्ड” को कहा जाता है।
  • भारत में प्रोजेक्ट टाइगर के जन्मदाता “कैलाश सांख्ला” को कहा जाता है।
  • जंगल गलियारा योजना के तहत कान्हा किसली, पन्ना और बाँधवगढ़ को जोड़ने का प्रस्ताव है ।
  • गिद्ध जनगणना 2021 के अनुसार प्रदेश में 9,408 गिद्ध पाए जाते हैं।
  • मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में सर्वाधिक गिद्ध (981) पाए जाते है ।
  • मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा कैक्टस गार्ड- —–सैलाना
  • म.प्र. का पहला क्रोकोडाइल रिसर्च सेंटर भोपाल के भदभदा में स्थापित किया जाएगा ।

वन सम्बंधित अधिनियम

  • National Park and Wildlife Sanctuary of Madhya Pradeshराष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्य
    National Park and Wildlife Sanctuary of Madhya Pradesh राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्य

    भारतीय वन अधिनियम —————-1927

  • भारतीय वन्य जीव अधिनियम ———–1972
  • भारतीय वन संरक्षण अधिनियम ———1980
  • भारतीय पर्यावरण संरक्षण अधिनियम —-1986
  • भारतीय जैव विविधता अधिनियम ———2002
  • भारतीय वन संरक्षण 1980 का नाम बदलकर 2023 में वन (संरक्षण एवं सवर्धन) अधिनियम, 1980 कर दिया गया है ।

चिंटू चीता

• अफ्रीकन चीतों के लिए श्योपुर जिले में स्थित कुनो पालपुर राष्ट्रीय उद्यान में जुलाई 2021 में चिंटू चीता नामक शुभंकर जारी किया है ।

मोगली उत्सव

• स्थानीय लोगों के अनुसार मोगली सिवनी जिले के आमोदागढ़ में पाया गया था ।

• इसलिए मोगली उत्सव पेंच राष्ट्रीय उद्यान (सिवनी )

में 2004 से मनाया जा रहा है।

मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी

• मध्यप्रदेश में सतना जिले के मुकुंदरपुर में भारत की प्रथम व्हाइट टाइगर सफारी स्थापित की गई है ।

• इसकी स्थापना 3 अप्रैल 2016 में की गई है ।

• इसका नाम महाराजा मार्तंड सिंह व्हाइट टाइगर सफारी रखा गया है ।

मध्यप्रदेश में पर्यावरण से संबंधित प्रथम

• प्रथम बायोस्फीयर रिजर्व – पचमढ़ी

• प्रथम जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान – डिंडोरी

प्रथम टाइगर प्रोजेक्ट- कान्हा किसली राष्ट्रीय उद्यान (मंडला)

• प्रथम राष्ट्रीय उद्यान – कान्हा किसली

• प्रथम आर्द्रभूमि (रामसर ) क्षेत्र – भोजताल

रोहन चक्रवर्ती

रोहन चक्रवर्ती एक प्रसिद्ध पर्यावरण कार्टूनिस्ट है ।

• कान्हा राष्ट्रीय उद्यान का शुभंकर “भूरसिंह द बारहसिंगा ” है,

जिसके डिज़ायनर रोहन चक्रवर्ती हैं।

• इन्हें ‘डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंटरनेशनल प्रेसिडेंट्स’ अवार्ड 2017 में प्राप्त हुआ है ।

• रोहन चक्रवर्ती ‘ग्रीन ह्यूमर’ नामक पत्रिका में कार्टूनिस्ट के रूप में कार्यरत है ।

देवरी इको घड़ियाल केंद्र

• यह मुरैना जिले में चम्बल नदी पर स्थित है ।

• यहाँ घड़ियाल के साथ-साथ बटागुर कछुओं का संरक्षण प्राकृतिक रूप से किया जा रहा है ।

इंदौर रीजनल पार्क

• मध्यप्रदेश का अटल बिहारी वाजपेयी पार्क इंदौर में स्थित हैं ।

• यह इंदौर रीजनल पार्क और पिपल्यापला पार्क के नाम से अधिक जाना जाता है ।

• इसकी स्थापना 2003 में की गई थी ।

चौसिंगा (Four horned antelope )

• मध्यप्रदेश में चौसिंगा कान्हा और पेंच राष्ट्रीय उद्यान में पाया जाता है।

• यह मृगों की टट्रासरस दुलर्भ प्रजाति है ।

• भारत में यह भारत-नेपाल सीमा पर देखने को मिलती है।

THE END

National Park in Madhya Pradesh — By Wikipedia [Click Here]

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