परिपत्र प्रारूप Circular letter
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परिपत्र प्रारूप Circular letter

Letter-Writing

पत्र-लेखन-कला

परिपत्र का प्रारूप Circular letter

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[ IT COVERS LAST 30 YEARS LETTERS OF UPPSC (UPPER+LOWER+RO/ARO) AND OTHER STATE CIVIL SERVICE EXAMINATIONS.MORE THAN 150 LETTERS WITH EXPLANATIONS ]-

(1) शासनादेश (G.O.),[ Official Letter] (2) अर्धशासकीय पत्र (D.O.), (3) परिपत्र (Circular Letter), (4) द्रुत पत्र (Express Letter) (5) अशासकीय पत्र (Unofficial Letter), (6) तार (Telegram), (7) कार्यालय स्मृति पत्र (Office Memorandum), (8) प्रस्ताव (Resolution), (9) प्रेस विज्ञप्ति (Press Communique), (10) अधिसूचना, सूचना, विज्ञापन (Notification, Advertisement, Notice), (11)पृष्ठांकन(Endorsement), (12) अनुस्मारक पत्र (Reminder)

Recently Asked Questions परिपत्र का प्रारूप Circular letter

प्रश्न-1 : कार्यालय आदेश और परिपत्र का अन्तर बताते हुए परिपत्र का लिखित प्रारूप प्रस्तुत कीजिए।

(UPPSC RO/ARO Mains Exam 2016)

प्रश्न-2 : परिपत्र किसे कहते हैं? स्वास्थ्य विभाग, उ.प्र. के प्रमुख सचिव की ओर से प्रदेश के पूर्वी जिलों के बच्चों को मस्तिष्क-ज्वर से बचाने के लिए उचित व्यवस्था हेतु परिपत्र तैयार कीजिए। (UPPSC MAINS EXAM 2019)

प्रश्न-3 : शासन की ओर से उत्तर प्रदेश के जिलाधिकारियों के नाम एक विधि सम्मत परिपत्र लिखिए जिसमें ‘घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम’ के अनुपालन के सम्बन्ध में आवश्यक निर्देश दिये गये हों। (UPPSC APS Mains Exam 2010)

प्रश्न-4 : परिपत्र का लिखित रूप में प्रारूप प्रस्तुत कीजिए।

(UP RO/ARO Mains General Hindi 2014) (UK PCS Mains General Hindi, 2006)

प्रश्न-5 : परिपत्र की परिभाषा देते हुए उसका एक प्रारूप प्रस्तुत कीजिए। (UP RO/ARO Mains Special General Hindi 2010)

प्रश्न-6 : ‘परिपत्र’ की विशेषताएँ सोदाहरण बताइये। (Uttarakhand PCS Mains General Hindi 2002)

प्रश्न-7. परिपत्र क्या है? परिपत्र का एक उदाहरण दीजिए। (UPPCS Mains General Hindi 2016, 1998)

प्रश्न-8 : परिपत्र की परिभाषा देते हुए उसकी विशेषताएँ लिखिए और उसका एक उदाहरण भी दीजिए।

(UPPCS Mains General Hindi 2015)

प्रश्न-9: परिपत्र का स्वरूप स्पष्ट करते हुए इसका एक उदाहरण दीजिए। – (UPPCS Mains General Hindi 2014)

प्रश्न-10 : परिपत्र एवं अधिसूचना में अन्तर बताते हुए परिपत्र का एक प्रारूप प्रस्तुत कीजिए। (UPPCS Mains General Hindi 2011)

प्रश्न-11 : राज्य सरकार की ओर से एक ‘परिपत्र’ का प्रारूप प्रस्तुत कीजिए, जिसमें प्रदेश के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में स्नातक कक्षाओं में 25% अतिरिक्त स्थान की सूचना दी गयी हो। (UPPCS Mains General Hindi 2008)

प्रश्न-12: सचिव, खाद्य एवं आपर्ति मंत्रालय, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से एक परिपत्र सभी जिलाधिकारियों को प्रेषित करें जिसमें खाद्यान्नों की वसूली की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है। (UPPCS Mains General Hindi 2007)

प्रश्न-13 : ‘परिपत्र’ और ‘अनुस्मारक’ का अन्तर स्पष्ट करते हुए ‘परिपत्र’ का एक प्रारूप प्रस्तुत कीजिए।

(UPPCS Special Mains General Hindi 2004)

प्रश्न-14 : परिपत्र की महत्ता को स्पष्ट करते हुए परिपत्र का एक प्रारूप प्रस्तुत कीजिए।

(UPPCS Mains General Hindi 2003)

प्रश्न-15 : परिपत्र भेजते समय किन प्रमुख तथ्यों को ध्यान में रखना आवश्यक है? सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।

(UPPCS Mains General Hindi 2000)

प्रश्न-16: अपने क्षेत्र के थानाध्यक्ष को पत्र लिखकर अनुरोध कीजिए कि आपके क्षेत्र में रात की गश्त बढ़ायी जाये ताकि लोग सुरक्षा का अनुभव करें। (लगभग 200 शब्दों में लिखिये।) (पत्र में अपना अथवा अन्य किसी का भी नाम, पता तथा अनुक्रमांक या संकेत न लिखें।) UPPCS सिंचाई विभाग परीक्षा, 2008

प्रश्न-17 : नगरों में बढ़ते हुए यातायात सम्बन्धी नियमों के उल्लंघन की समस्या का निवारण करने हेतु एक दैनिक समाचार पत्र के सम्पादक के नाम 200 शब्दों में शिकायती पत्र लिखिए। (पत्र में अपना या अन्य का नाम, पता, अनुक्रमांक आदि संकेतों को न लिखें।) UPPCS सिंचाई विभाग परीक्षा, 2005

प्रश्न-18 : ‘साक्षरता के महत्त्व’ पर अपने मित्र के नाम 200 शब्दों में एक पत्र लिखिये। (पत्र में अपना अथवा अन्य किसी का भी नाम, पता व अनुक्रमांक न लिखें।)

टिप्पणी लेखन

प्रश्न-1 : उपसचिव, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा ‘सेवा-निवृत्ति की आयु में परिवर्तन’ के विषय में नियंत्रक व महालेखा-परीक्षक, नई दिल्ली को लिखे गए पत्र पर अनुभाग अधिकारी द्वारा लिखी गई टिप्पणी लिखिए।

UKPSC RO/ARO Mains Exam 2016

अनुस्मारक

प्रश्न-1 : अनुस्मारक का अर्थ स्पष्ट करते हुए उसका लिखित प्रारूप बनाइए।

प्रश्न-1 : कार्यालय आदेश और परिपत्र का अन्तर बताते हुए परिपत्र का लिखित प्रारूप प्रस्तुत कीजिए।

(UPPSC RO/ARO Mains Exam 2016) परिपत्र प्रारूप Circular letter

उत्तर-

कार्यालय आदेश व परिपत्र में अन्तर
कार्यालय आदेश परिपत्र
इसकी विषय-वस्तु नियुक्ति, स्थानांतरण, अवकाश या किसी कर्मचारी विषयक चेतावनी इत्यादि से सम्बन्धित होती है। इसकी विषयवस्तु नीति, निर्णय, आदेश, निर्देश इत्यादि से सम्बन्धित होती है।
इसका उद्गम कार्यालय के उच्च प्राधिकारी के स्तर से होता है। इसका उद्गम शासन के भीतर किसी भी प्राधिकारी के स्तर से होता है।
इसका संचालन एक आयामी होता है। इसका संचालन बहुआयामी होता है।
यह सूचनार्थ तथा अनुपालनार्थ दोनों हो सकता है। यह अनिवार्यतः अनुपालनार्थ होता है।
यह नियत प्रारूप पर व्यवहृत होता है। इसका प्रारूप निश्चित नहीं होता है यह प्रशासकीय पत्रों के विभिन्न प्रारूपों पर लिखा जाता है।

परिपत्र का लिखित प्रारूप

संख्या – 1503/20च/200-21

प्रेषक,

           क.ख.ग.,

           अपर मुख्य सचिव,

            उ.प्र. शासन।

सेवा में,

              समस्त मण्डलायुक्त,

                  उ.प्र. शासन।

अनुभाग-3

दिनांक –16 अगस्त, 2021, लखनऊ

विषय- कोचिंग संस्थानों को खोले जाने विषयक।

महोदय,

                      उपर्युक्त विषय के सन्दर्भ में यह निर्देश हुआ है कि अनिवार्य साप्ताहिक कोविड कर्फ्यू को छोड़कर अन्य दिनों में उल्लिखित शर्तों के आधार पर कोचिंग संस्थानों को संचालित करने की अनुमति प्रदान की जाती है।

                        2. उक्त गतिविधियों को आरम्भ करते समय कोचिंग में कोविड हेल्प डेस्क, मास्क की अनिवार्यता, सेनेटाइजर तथा निर्धारित दो गज की दूरी सम्बन्धित व्यवस्था अनिवार्य रूप से पालन की जाए।

भवदीय

ह0………..

राज (क.ख.ग.)

अपर मुख्य सचिव।

प्रतिलिपि निम्न को सूचनार्थ प्रेषित

1- समस्त पुलिस महानिदेशक।

2- पुलिस आयुक्त, लखनऊ।

3- समस्त जिलाधिकारी।

आज्ञा से

ह0……….

(क.ख.ग)

अपर मुख्य सचिव


प्रश्न-2 : परिपत्र किसे कहते हैं? स्वास्थ्य विभाग, उ.प्र. के प्रमुख सचिव की ओर से प्रदेश के पूर्वी जिलों के बच्चों को मस्तिष्क-ज्वर से बचाने के लिए उचित व्यवस्था हेतु परिपत्र तैयार कीजिए। (UPPSC MAINS EXAM 2019)परिपत्र प्रारूप Circular letter

उत्तर-

परिपत्र (Circular) : परिपत्र, पत्र आलेखन का वह औपचारिक प्रारूप होता है जिसमें शासकीय नीतियों, निर्णयों, निदेशों, आदेशों एवं सूचनाओं को विषय बनाकर एक साथ अनेक प्रेषितियों को भेजा जाता है। इसका कोई अपना निश्चित प्रारूप नहीं होता है. बल्कि यह सरकारी पत्रों के विभिन्न प्रारूपों में भेजा जाता है।

परिपत्र का उदाहरण

सं.-1321/आठ-6-32/2019-20

प्रेषक,

          क.ख.ग.,

           मुख्य सचिव,

            स्वास्थ्य विभाग,

           उ.प्र. सरकार, लखनऊ।

सेवा में,

             समस्त मुख्य चिकित्साधिकारी,

              उ.प्र. सरकार,

             लखनऊ।

अनुभाग-2

दि.- 2 दिसम्बर, 2020, लखनऊ

विषय- प्रदेश के पूर्वी जिलों के बच्चों को मस्तिष्क ज्वर से बचाने हेतु उचित व्यवस्था करने के सन्दर्भ में परिपत्र।

महोदय,

                       उक्त विषय में आपको निर्देशित है कि वर्तमान समय में प्रदेश के पूर्वी जिलों के बच्चे मस्तिष्क ज्वर की समस्या से पीड़ित हैं। समस्या के गम्भीर होने से पूर्व ही इसके रोक थाम की उचित व्यवस्था की जाए, क्योंकि समस्या के गम्भीर होने पर बच्चों के जीवन के लिए खतरा उत्पन्न हो सकता है।

                     2. उक्त का गम्भीरता से संज्ञान लेते हुए तत्काल उचित कदम उठाएँ तथा कृत कार्यवाही का साप्ताहिक विवरण मंत्रालय को प्रेषित करें।

भवदीय

संलग्नक- राज्य के पूर्वी जिलों में मस्तिष्क ज्वर की वर्तमान स्थिति से सम्बन्धित समाचार पत्रों की छायाप्रति।

ह0…………..

(क.ख.ग.)

मुख्य सचिव।

प्रतिलिपि निम्न को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषितः

1. पूर्वी जिलों के समस्त जिलाधिकारी।

2. पूर्वी जिलों के समस्त मुख्य चिकित्साधिकारी।

आज्ञा से

ह0………..

(क.ख.ग.)

मुख्य सचिव


प्रश्न-3 : शासन की ओर से उत्तर प्रदेश के जिलाधिकारियों के नाम एक विधि सम्मत परिपत्र लिखिए जिसमें ‘घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम’ के अनुपालन के सम्बन्ध में आवश्यक निर्देश दिये गये हों। (UPPSC APS Mains Exam 2010) परिपत्र प्रारूप Circular letter

उत्तर:

परिपत्र

सं0 -15क/3ख/2010-11

प्रेषक,

            क.ख.ग.,

          मुख्य सचिव,

           उ0 प्र0 शासन,

             लखनऊ।

सेवा में,

             समस्त जिलाधिकारी,

              उ0 प्र0 शासन।

अनुभाग- 3

दि. – 20 अगस्त, 2010, लखनऊ

विषय : घरेलू हिंसा उन्मूलन अधिनियम के अनुपालन के आशय से परिपत्र।

महोदय,

                        उक्त विषय के सम्बन्ध में आपको यह निर्देश हुआ है कि प्रदेश में बढ़ रही महिलाओं के प्रति हिंसक घटनाओं से सरकार चिंतित है। एनसीआरबी द्वारा हाल में जारी किये गये आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि प्रदेश स्तर पर महिला अपराध के मामलों में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है। एनसीआरबी की जिलेवार अपराध सम्बन्धी आंकड़ों की प्रति इस पत्र के साथ संलग्न कर दी गयी है।

2- महिला हिंसा रोकथाम हेतु ‘घरेलू हिंसा उन्मूलन अधिनियम-2005’ के प्रावधानों का पालन किया जाए तथा ऐसे मामलों में कानूनी स्तर पर अधिक सक्रियता दिखायी जाए।

3- उक्त का तत्काल प्रभाव से अनुपालन सुनिश्चित करते हुए कृत कार्यवाही से एक माह के भीतर शासन को अवगत कराया जाए।

भवदीय

संलग्नक- यथोक्त।

ह0……………..

(क.ख.ग.)

मुख्य सचिव।

प्रतिलिपि निम्न को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित

1- समस्त पुलिस अधीक्षक, उ0प्र0।

2- समस्त मण्डलायुक्त, उ0प्र0।

आज्ञा से

ह0………………

(क.ख.ग.)

मुख्य सचिव


प्रश्न-4 : परिपत्र का लिखित रूप में प्रारूप प्रस्तुत कीजिए।

(UP RO/ARO Mains General Hindi 2014) (UK PCS Mains General Hindi, 2006) परिपत्र प्रारूप Circular letter

उत्तर-

परिभाषा-परिपत्र आलेखन का वह औपचारिक प्रारूप होता है जिसके माध्यम से एक साथ कई अधिकारियों को समान प्रकार की सूचनाएं आदेश, निर्देश, वार्ता-बैठक, विचार-विमर्श इत्यादि संदर्भित पत्र व्यवहार किया जाता है।

विशेषता- परिपत्र की महत्त्वपूर्ण विशेषताएं निम्नवत् है

  1. परिपत्र अर्थात् सर्कुलर का तात्पर्य ही यही होता है कि एक ऐसा पत्र जो सभी दिशाओं में गतिशील हो जाए।
  2. यह एक प्रेषक द्वारा एक साथ कई प्रेषितियों को भेजा जाता है।
  3. इसकी विषय-वस्तु शासकीय कार्य-व्यवहार से जुड़ी होती है जिन्हें प्रतिलिपियों के माध्यम से अनेक लोगों को भेज दिया जाता है।
  4. परिपत्र का संचालन एक आयामी अथवा द्विआयामी होता है तथा गन्तव्य की दिशा में यह बहुआयामी होता है।
  5. परिपत्र का अपना कोई प्रारूप नहीं होता है, बल्कि यह प्रशासकीय पत्र के किसी रूप में ही भेजा जाता है।
  6. इसकी भाषा-शैली और विशेषताएँ भी उसी पत्र के सापेक्षिक हो जाती है जिस प्रारूप में यह पत्र प्रेषित किया जाता है।

परिपत्र का लिखित प्रारूप (शासकीय)

सं0- 10क/3(2)/2014-15

प्रेषक,

                क.ख.ग.,

                सचिव, लोक निर्माण विभाग,

                उत्तर प्रदेश सरकार।

सेवा में,

             समस्त मुख्य अभियन्ता,

                उ0प्र0सरकार।

अनुभाग-2

दि0- 12 जनवरी, 2014, प्रयागराज

विषयः- प्रदेश की सड़कों को गड्ढा मुक्त बनाए जाने सम्बन्धी कार्य-योजना के सन्दर्भ में परिपत्र।

महोदय,

                      उक्त विषय के सम्बन्ध में यह निर्देश करना है कि प्रदेश सरकार द्वारा राज्य की सभी सड़कों को 15/08/2014 तक गड्ढा मुक्त बनाए जाने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके अन्तर्गत सभी राष्ट्रीय राजमार्ग, राजकीय राजमार्ग और जिला तथा ग्रामीण क्षेत्र की सभी सड़कें आच्छादित हैं।

               2. इस सम्बन्ध में सघन निरीक्षण कर ऐसी सभी चिह्नित सड़कों को तय समय-सीमा के भीतर गड्डा मुक्त बनाने हेतु प्रयास करें।

भवदीय

संलग्नक- (1)

1. उक्त योजना-सन्दर्भित दिशा निर्देशों की छायाप्रति।

ह0………….

(क.ख.ग.)

सचिव।


प्रश्न-5 : परिपत्र की परिभाषा देते हुए उसका एक प्रारूप प्रस्तुत कीजिए। (UP RO/ARO Mains Special General Hindi 2010) परिपत्र प्रारूप Circular letter

उत्तर- परिभाषा-परिपत्र आलेखन का वह औपचारिक प्रारूप होता है जिसके माध्यम से एक साथ कई अधिकारियों को समान प्रकार की सूचनाएँ आदेश, निर्देश, वार्ता-बैठक, विचार-विमर्श इत्यादि संदर्भित पत्र व्यवहार किया जाता है। विशेषता- परिपत्र की महत्त्वपूर्ण विशेषताएं निम्नवत् है

  1. परिपत्र अर्थात सर्कुलर का तात्पर्य ही यही होता है कि एक ऐसा पत्र जो सभी दिशाओं में गतिशील हो जाए।
  2. यह एक प्रेषक द्वारा एक साथ कई प्रेषितियों को भेजा जाता है।
  3. इसकी विषय-वस्तु शासकीय कार्य-व्यवहार से जुड़ी होती है जिन्हें प्रतिलिपियों के माध्यम से अनेक लोगों को भेज दिया जाता है।
  4. परिपत्र का संचालन एक आयामी अथवा द्विआयामी होता है तथा गन्तव्य की दिशा में यह बहुआयामी होता है।
  5. परिपत्र का अपना कोई प्रारूप नहीं होता है, बल्कि यह प्रशासकीय पत्र के किसी रूप में ही भेजा जाता है।
  6. इसकी भाषा-शैली और विशेषताएँ भी उसी पत्र के सापेक्षिक हो जाती है जिस प्रारूप में यह पत्र प्रेषित किया जाता है।

परिपत्र का प्रारूप (शासकीय)

सं0-………………………

प्रेषक,

           नाम…..,

           पद………………. ,

           शा0 पता ………………।

सेवा में,

              समस्त पद……………..,

             शा0 पता………………।

अनुभाग-..

दि0………….,स्थान………. ……..

विषय……….. के सन्दर्भ में परिपत्र।

महोदय,

उक्त विषय में निर्देशित है कि… ……………………..

…………………………………………………………………..।

2……………………………………

भवदीय

संलग्नक-

1. …………………

ह0………….

(नाम-………..)

पद -…………।

प्रतिलिपि निम्न को सूचनार्थ प्रेषितः

1. ………

2. ………… …………..।

आज्ञा से

(नाम-…………)

पद-…………..


प्रश्न-6 : ‘परिपत्र’ की विशेषताएँ सोदाहरण बताइये। (Uttarakhand PCS Mains General Hindi 2002) परिपत्र प्रारूप Circular letter

उत्तर

परिभाषा-परिपत्र आलेखन का वह औपचारिक प्रारूप होता है जिसके माध्यम से एक साथ कई अधिकारियों को समान प्रकार की सूचनाएं आदेश, निर्देश, वार्ता-बैठक, विचार-विमर्श इत्यादि संदर्भित पत्र व्यवहार किया जाता है।

विशेषता- परिपत्र की महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ निम्नवत् है

  1. परिपत्र अर्थात सर्कुलर का तात्पर्य ही यही होता है कि एक ऐसा पत्र जो सभी दिशाओं में गतिशील हो जाए।
  2. यह एक प्रेषक द्वारा एक साथ कई प्रेषितियों को भेजा जाता है।
  3. इसकी विषय-वस्तु शासकीय कार्य-व्यवहार से जुड़ी होती है जिन्हें प्रतिलिपियों के माध्यम से अनेक लोगों को भेज दिया जाता है।
  4. परिपत्र का संचालन एक आयामी अथवा द्विआयामी होता है तथा गन्तव्य की दिशा में यह बहुआयामी होता है।
  5. परिपत्र का अपना कोई प्रारूप नहीं होता है, बल्कि यह प्रशासकीय पत्र के किसी रूप में ही भेजा जाता है।
  6. इसकी भाषा-शैली और विशेषताएँ भी उसी पत्र के सापेक्षिक हो जाती है जिस प्रारूप में यह पत्र प्रेषित किया जाता है।

परिपत्र (अर्द्धशासकीय) का उदाहरण

सं0-12क/2च/2002-03

क.ख.ग.,

परीक्षा नियंत्रक।

परीक्षा नियंत्रक कार्यालय

लो0से0आयोग, उ0प्र0

अनभाग-1

दि0- 12 मार्च, 2002,प्रयागराज

विषय- उ0प्र0 लोक सेवा आयोग की विभिन्न परीक्षाओं को सम्पन्न कराने के लिए परीक्षा केन्द्रों को उपलब्ध कराये जाने हेतु।

प्रिय श्री महोदय,

                              उक्त विषय के सम्बन्ध में आपसे अपेक्षा है कि आयोग की विभिन्न परीक्षाओं को सुचारु रूप से सम्पन्न कराने के लिए प्रदेश के समस्त डिग्री कालेजों को परीक्षा केन्द्र के रूप में बनाया जाना सुनिश्चित किया गया है। तत् सम्बन्ध में आपकी पूर्व सहमति अति आवश्यक है।

                               2. इस सम्बन्ध में यदि आपका प्रत्युत्तर 25 मार्च, 2002 तक आयोग को प्राप्त हो सके, तो दिनांक 5 अप्रैल, 2002 को आयोग की समीक्षा बैठक में इस आशय हेतु अग्रेतर कार्यवाही करायी जा सके।

सादर,

भवन्निष्ठ

संलग्नक-यथोक्त।

ह0 ……….

(क.ख.ग.)

सेवा में,

समस्त प्रधानाचार्य,

समस्त राजकीय डिग्री कालेज,

उत्तर प्रदेश।


प्रश्न-7. परिपत्र क्या है? परिपत्र का एक उदाहरण दीजिए। (UPPCS Mains General Hindi 2016, 1998) परिपत्र प्रारूप Circular letter

उत्तर-

परिभाषा- परिपत्र आलेखन का वह औपचारिक प्रारूप होता है जिसके माध्यम से एक साथ कई अधिकारियों को समान प्रकार की सूचनाएँ आदेश, निर्देश, वार्ता-बैठक, विचार-विमर्श इत्यादि संदर्भित पत्र व्यवहार किया जाता है।

विशेषता- परिपत्र की महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ निम्नवत् है

  1. परिपत्र अर्थात सर्कुलर का तात्पर्य ही यही होता है कि एक ऐसा पत्र जो सभी दिशाओं में गतिशील हो जाए।
  2. यह एक प्रेषक द्वारा एक साथ कई प्रेषितियों को भेजा जाता है।
  3. इसकी विषय-वस्तु शासकीय कार्य-व्यवहार से जुड़ी होती है जिन्हें प्रतिलिपियों के माध्यम से अनेक लोगों को भेज दिया जाता है।
  4. परिपत्र का संचालन एक आयामी अथवा द्विआयामी होता है तथा गन्तव्य की दिशा में यह बहुआयामी होता है।
  5. परिपत्र का अपना कोई प्रारूप नहीं होता है, बल्कि यह प्रशासकीय पत्र के किसी रूप में ही भेजा जाता है।
  6. इसकी भाषा-शैली और विशेषताएँ भी उसी पत्र के सापेक्षिक हो जाती है जिस प्रारूप में यह पत्र प्रेषित किया जाता है।

परिपत्र का उदाहरण

संख्या-15/25/2016-17

प्रेषक,

           अ.ब.स.,

           परीक्षा नियंत्रक,

           संघ लोक सेवा आयोग, नई दिल्ली।

सेवा में,

         समस्त अनुभाग अधिकारी,

          संघ लोक सेवा आयोग,

         नई दिल्ली।

अनुभाग-2

दिनांक– 10 मई, 2016, नई दिल्ली

विषय– विभिन्न परीक्षाओं की वर्षवार पत्रावलियों के डिजिटल अभिलेख तैयार किये जाने एवं उनके समुचित रख-रखाव हेतु आवश्यक निर्देशों के सन्दर्भ में।

महोदय,

                          मुझे यह कहने का निर्देश हुआ है कि विभिन्न परीक्षाओं की पत्रावलियां संरक्षणीय महत्त्व की है जिन्हें विभिन्न शासकीय कार्यों के दृष्टिगत अनिवार्य रूप से सुरक्षित किया जाना अनिवार्य है।

             2. तत्क्रम में सभी अनुभाग अधिकारियों को निदेशित किया जाता है कि वे अपने अनुभाग स्तर पर ऐसे समस्त पत्रावलियों का विवरण वर्षवार तैयार करायें जिससे डिजिटलाइजेशन की प्रक्रिया निर्धारित समय में पूरी की जा सके।

भवदीय

ह…………

(अ.ब.स.)

परीक्षा नियंत्रक।

प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित

1. समस्त अनुभाग अधिकारी, संघ लोक सेवा आयोग।

आज्ञा से

ह…………

(अ.ब.स.)

परीक्षा नियंत्रक


प्रश्न-8 : परिपत्र की परिभाषा देते हुए उसकी विशेषताएँ लिखिए और उसका एक उदाहरण भी दीजिए।

(UPPCS Mains General Hindi 2015) परिपत्र प्रारूप Circular letter

उत्तर

परिभाषा-परिपत्र आलेखन का वह औपचारिक प्रारूप होता है जिसके माध्यम से एक साथ कई अधिकारियों को समान प्रकार की सूचनाएँ आदेश, निर्देश, वार्ता-बैठक, विचार-विमर्श इत्यादि संदर्भित पत्र व्यवहार किया जाता है।

विशेषता- परिपत्र की महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ निम्नवत् है

  1. परिपत्र अर्थात सर्कुलर का तात्पर्य ही यही होता है कि एक ऐसा पत्र जो सभी दिशाओं में गतिशील हो जाए।
  2. यह एक प्रेषक द्वारा एक साथ कई प्रेषितियों को भेजा जाता है।
  3. इसकी विषय-वस्तु शासकीय कार्य-व्यवहार से जुड़ी होती है जिन्हें प्रतिलिपियों के माध्यम से अनेक लोगों को भेज दिया जाता है।
  4. परिपत्र का संचालन एक आयामी अथवा द्विआयामी होता है तथा गन्तव्य की दिशा में यह बहुआयामी होता है।
  5. परिपत्र का अपना कोई प्रारूप नहीं होता है, बल्कि यह प्रशासकीय पत्र के किसी रूप में ही भेजा जाता है।
  6. इसकी भाषा-शैली और विशेषताएँ भी उसी पत्र के सापेक्षिक हो जाती है जिस प्रारूप में यह पत्र प्रेषित किया जाता है।

परिपत्र का उदाहरण (शासकीय)

सं0-10क/च/2018-19

प्रेषक,

         क.ख.ग.,

          मुख्य सचिव,

         उ0प्र0सरकार।

सेवा में,

        समस्त पुलिस अधीक्षक,

         उ0प्र0 शासन।

अनुभाग-1

दि0-12 दिसम्बर, 2018, प्रयागराज

विषय- कुम्भ-मेला 2018-19 के दौरान कानून व्यवस्था की मजबूत स्थिति सुनिश्चित करने के सन्दर्भ में परिपत्र।

महोदय,

                  उक्त विषय में आपको निर्देशित किया जाता है कि प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी प्रयागराज में गंगा-यमुना के संगम तट पर कुम्भ-मेला 2018-19 का आयोजन किया जा रहा है जिसमें देश-विदेश से जन भागीदारी अपेक्षित है।

                      2. उक्त परिप्रेच्छ में आपेक स्तर से कानून व्यवस्था की मजबूत स्थिति सुनिश्चित की जाए जिससे आगन्तुकों को किसी भी प्रकार की कानूनी अथवा यातायात संबंधी अव्यवस्था का सामना न करना पड़े।

भवदीय

संलग्नक-यथोक्त।

ह0 ………..

(क.ख.ग.)

मु0 सचिव।

प्रतिलिपि निम्न को सूचनार्थ प्रेषितः-

1. पुलिस महानिदेशक, उ0प्र0 शासन।

2. समस्त जिला अधिकारी, उ0प्र0 शासन।

आज्ञा से

ह…………

(क.ख.ग.) (क.ख.ग.)

मु0 सचिव।


प्रश्न-9: परिपत्र का स्वरूप स्पष्ट करते हुए इसका एक उदाहरण दीजिए। – (UPPCS Mains General Hindi 2014) परिपत्र प्रारूप Circular letter

उत्तर

परिपत्र का स्वरूप ऐसा कोई आदेश, सूचना या सुझाव जो बहुत से व्यक्तियों या अधिकारियों या विभागों को एक साथ देनी होती है, ऐसी स्थिति में । इसका उपयोग पत्र प्रतिलिपि या ज्ञापन के रूप में आवश्यकता अनुरूप किया जाता है। परिपत्र का उद्देश्य किसी भी मन्त्रालय या विभाग द्वारा अपने अधीनस्थ कार्यालयों या अनुभागों को विभागीय सूचना या आदेश एकसाथ प्रेषित करना है।

इस प्रकार के पत्रों का प्रयोग तब किया जाता है, जब किसी नीति विषयक मामले की जानकारी उन सभी विभागों या कार्यालयों को करानी होती है जो सम्बन्धित विषय से सम्बन्ध रखते हों।

परिपत्र का उदाहरण इस प्रकार है- .

संख्या –15/25/04/2014-15

प्रेषक,

           क.ख.ग.,

           मुख्य सचिव,

           उत्तर प्रदेश शासन।

सेवा में,

           समस्त सचिव, उत्तर प्रदेश शासन,

           समस्त विभागाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश,

           समस्त जिलाधिकारी, उत्तर प्रदेश।

अनुभाग-2

लखनऊ, दिनांक -10 मई, 2015

विषय- राज्य सरकार के अधीन पदों तथा सेवाओं में अनुसूचित जातियों के प्रतिनिधित्व के सन्दर्भ में परिपत्र।

महोदय,

                मझे यह कहने का निर्देश हुआ है कि नियुक्ति (ख) विभाग के उपर्युक्त विषयक शासनादेश संख्या – 367-2A67 /2003 दिनांक 30 सितम्बर, 2005 के अन्तर्गत यह निर्दिष्ट किया गया था कि प्रशासन में कुशलता बनाये रखने के लिए योग्यता का जो न्यूनतम मापक नियत किया जाए वह सभी उम्मीदवारों के लिए समान होना चाहिए।

                2. हाल ही में यह प्रश्न विचारार्थ आया कि क्या पूर्वोक्त आदेशों में दी गयी सुविधा भारत सरकार द्वारा दी गयी सुविधाओं के अनुरूप है या नहीं? यह अनुभव किया गया कि इस सम्बन्ध में राज्य सरकार द्वारा दी गई सुविधाएँ भारत सरकार द्वारा दी गयी सुविधाओं के अनुरूप नहीं है। अतएव शासन ने यह निर्णय लिया है कि भविष्य में सीधी भर्ती के मामले में चाहे वह परीक्षा द्वारा हो या अन्यथा, यदि आरक्षित सभी रिक्तियों को भरने के लिए सामान्य मापदण्ड के आधार पर अनुसूचित जातियों के उम्मीदवार काफी संख्या में उपलब्ध न हों, तो शेष आरक्षित रिक्तियों को भरने के लिए इन समुदायों के उम्मीदवारों को चुना जा सकता है, बशर्ते कि वे ऐसे पद या पदों के लिए अयोग्य न पाये जाएँ।

                       3. उपर्युक्त के अतिरिक्त यदि श्रेणी 3 व 4 के अप्राविधिक और अर्द्ध-प्राविधिक सेवाओं/पदों में अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए जितने रिक्त पद आरक्षित हों, उन पर नियुक्ति के लिए इन जातियों के अभ्यर्थी मापदण्ड शिथिल करने के उपरान्त भी उपलब्ध न हों, तो उनमें से ऐसे सर्वोत्तम अभ्यर्थियों का चयन करें जिनमें भर्ती के नोटिस व विज्ञापन में दी गई न्यूनतम शैक्षिक अर्हता है। इन अभ्यर्थियों को उस न्यूनतम मानक (Standard) तक लाने के लिए जो इन पदों के लिए तथा प्रशासन की दक्षता बनाये रखने के लिए आवश्यक हो, सेवारत प्रशिक्षण की व्यवस्था नियुक्ति प्राधिकारियों द्वारा उनके अपने ही कार्यालयों में की जायेगी। ऐसे अभ्यर्थियों को नियुक्ति के बाद परिवीक्षाधीन रखा जायेगा और परिवीक्षा सम्बन्धी नियम/आदेश उन पर लागू होंगे।

भवदीय

ह0………….

(क.ख.ग.)

मुख्य सचिव।


प्रश्न-10 : परिपत्र एवं अधिसूचना में अन्तर बताते हुए परिपत्र का एक प्रारूप प्रस्तुत कीजिए। (UPPCS Mains General Hindi 2011) परिपत्र प्रारूप Circular letter

उत्तर-परिपत्र तथा अधिसूचना में निम्नलिखित अन्तर है

(i) परिपत्र का उद्गम सदैव एक पद या पदाधिकारी के स्तर से होता है। यह पद वरिष्ठ या कनिष्ठ कोई भी हो सकता है, जबकि अधिसूचना/विज्ञप्ति का उद्गम सर्वोच्च प्राधिकारी के स्तर से होता है।।

(ii) परिपत्र का संचालन बहुआयामी होता है, जबकि अधिसूचना का संचालन ऊपर से नीचे सदैव एक आयामी होता है।

(iii) परिपत्र का अपना कोई निश्चित प्रारूप नहीं होता है बल्कि यह प्रशासकीय पत्रों के विभिन्न प्रारूपों पर भेजा जाता है, जबकि अधिसूचना का प्रारूप निश्चित होता है जिसका प्रकाशन गजट में अनिवार्य रूप से कर दिया जाता है।

(iv) परिपत्र की अपनी कोई भाषा-शैली नहीं होती है बल्कि इस पत्र को जिस प्रारूप पर प्रेषित किया जाता है उसी की भाषा-शैली को ग्रहण कर लेता है जबकि अधिसूचना की भाषा-शैली तटस्थ भाव से अन्य पुरुष व अप्रत्यक्ष अनुकथन की होती है। । (v) परिपत्र का प्रभाव शासकीय विभागों/कार्यालयों/व्यक्तियों तक होता है जबकि अधिसूचना का प्रभाव जन-साधारण तक होता है।

परिपत्र (अर्द्धशासकीय) प्रारूप

संख्या-…………….

विभाग-……………….

नाम-…………………..,

पद…………………I

अनुभाग-…………………..

दिनांक…………….., स्थान….

विषय-………………………..के सम्बन्ध में परिपत्र।

प्रिय श्री महोदय,

उपर्युक्त विषय के सन्दर्भ में आपसे आग्रह है…………………………………….।

2…………………………………………………………………………………………………I

सादर,

संलग्नक-यथोक्त।

भवन्निष्ठ

ह0………….

नाम…………….

सेवा में,

समस्त पद………………,

पता………………………..I


प्रश्न-11 : राज्य सरकार की ओर से एक ‘परिपत्र’ का प्रारूप प्रस्तुत कीजिए, जिसमें प्रदेश के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में स्नातक कक्षाओं में 25% अतिरिक्त स्थान की सूचना दी गयी हो। (UPPCS Mains General Hindi 2008) परिपत्र प्रारूप Circular letter

उत्तर

परिपत्र का स्वरूप

संख्या 15/20/09/(2) 2009-10

प्रेषक

       अ. ब. स.,

        सचिव, शिक्षा विभाग,

         उ.प्र. शासन।

सेवा में,

         समस्त कुलपति/प्रधानाचार्य,

         समस्त विश्वविद्यालय,

          समस्त महाविद्यालय,

           उत्तर प्रदेश।

अनुभाग – 1

दि0- 12 जुलाई, 2008, लखनऊ

विषय- प्रदेश के समस्त विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में स्नातक कक्षाओं में अतिरिक्त स्थानों की सूचना के सन्दर्भ

में परिपत्र।

महोदय,

                  उक्त विषय में निर्देशित है कि प्रदेश के समस्त विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में प्रवेश के इच्छुक छात्रों की संख्या को देखते हुए शासन द्वारा 25% अतिरिक्त स्थान बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। जिससे इच्छुक छात्रों के प्रवेश सम्बन्धी समस्या का निराकरण किया जा सके।

              2. तत् सम्बन्ध में 25% अतिरिक्त स्थानों का निर्धारण करते हुए उक्त की सूचना तत्काल प्रभाव से शासन को प्रेषित करें।

संलग्नक-उपर्युक्तानुसार।

भवदीय

ह0……………..

(अ.ब.स.)

सचिव।


प्रश्न-12: सचिव, खाद्य एवं आपर्ति मंत्रालय, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से एक परिपत्र सभी जिलाधिकारियों को प्रेषित करें जिसमें खाद्यान्नों की वसूली की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है। (UPPCS Mains General Hindi 2007) परिपत्र प्रारूप Circular letter

उत्तर –

परिपत्र

स0-15/85/2007-08

प्रेषक,

          अ.ब.स.,

          सचिव, खाद्य एवं आपूर्ति मंत्रालय,

           उत्तर प्रदेश सरकार।

सेवा में,

           समस्त जिलाधिकारी,

           उत्तर प्रदेश।

अनुभाग-4

लखनऊ, दिनांक-5 मई, 2009

विषय- प्रदेश में खाद्यान्नों की वसूली की व्यवस्था करने के सम्बन्ध में परिपत्र।

महोदय,

                           मुझे यह कहने का निर्देश हुआ है कि प्रदेश में खाद्यान्न वसूली की प्रक्रिया में विभिन्न प्रकार की अनियमितताएँ हाल में प्रकाश में आयी हैं। इस सम्बन्ध में शासन ने खाद्यान्न वसूली की व्यवस्था यथेष्ट रूप से सुनिश्चित कराने का निर्णय लिया है। इस क्रम में यह आदेश सभी जिलाधिकारियों पर समान रूप से लागू होगा।

            2. उक्त का अनुपालन तत्काल प्रभाव से सुनिश्चित करें।

भवदीय

ह0…………….

(अ. ब. स.)

सचिव।

प्रतिलिपि निम्न को सूचनार्थ प्रेषित

(1) समस्त मण्डलायुक्त, उ0प्र0 शासन।

आज्ञा से

ह0…………….

(अ. ब. स.)

सचिव


प्रश्न-13 : ‘परिपत्र’ और ‘अनुस्मारक’ का अन्तर स्पष्ट करते हुए ‘परिपत्र’ का एक प्रारूप प्रस्तुत कीजिए।

(UPPCS Special Mains General Hindi 2004) परिपत्र प्रारूप Circular letter

उत्तर-

परिपत्र एवं अनुस्मारक का अन्तर

  1. परिपत्र के माध्यम से एक साथ कई अधिकारियों को समान प्रकार की सचनाएँ. आदेश, निर्देश. वार्ता-बैठक इत्यादि सन्दर्भित पत्र व्यवहार किये जाते हैं जबकि अनुस्मारक के माध्यम से किसी प्राधिकारी को किसी मामले में किसी प्रकार की कार्यवाही विषयक स्मरण दिलाने से सम्बन्धित पत्र व्यवहार किया जाता है।
  2. परिपत्र का उद्गम स्थान तो एक होता है किन्तु इसका गन्तव्य अनेक होता है जबकि अनुस्मारक का उद्गम सदैव उसी प्राधिकारी/ कार्यालय से होता है जहाँ से मूल पत्र प्रेषित किया गया था तथा इसका गन्तव्य भी मूल पत्र का प्राधिकारी/कार्यालय होता है।
  3. परिपत्र की विषय-वस्तु सदैव शासकीय कार्य व्यवहारों के परिप्रेक्ष्य में होती है जिन्हें प्रतिलिपियों के माध्यम से एक साथ अनेक लोगों को भेज दिया जाता है जबकि अनुस्मारक की विषय वस्तु के रूप में लम्बित कार्यवाही का संक्षिप्त विवरण देते हुए इसके शीघ्र निराकरण हेतु कहा जाता है।

परिपत्र (शासकीय) का प्रारूप

सं0-…………”

प्रेषक,

          नाम-………………………..,

          पद-………………………

           शा0 पता-………. I

सेवा में,

            समस्त पद-

             शा0 पता-…..I.

अनुभाग-………….

दि0-………….,स्थान-………..

विषय-…………………………………..के सन्दर्भ में परिपत्र।

महोदय,

उक्त विषय के सन्दर्भ में निर्देशित है कि…………………………………….।

2……………………………………………………………………………………….।

3. उक्त का अनुपालन तत्काल प्रभाव से सुनिश्चित करें।

भवदीय

संलग्नक- (1)

1………………..

ह0………..

नाम – …………..

पद – ………….

प्रतिलिपि निम्न को सूचनार्थ प्रेषितः

1. ………………….।

2. …………………………….।

आज्ञा से

ह0 ………..

नाम- …………

पद- ………


प्रश्न-14 : परिपत्र की महत्ता को स्पष्ट करते हुए परिपत्र का एक प्रारूप प्रस्तुत कीजिए।

(UPPCS Mains General Hindi 2003) परिपत्र प्रारूप Circular letter

उत्तर :

परिपत्र का महत्त्व– परिपत्र के प्रयोग से जहाँ कार्यालयी कार्य व्यवहार में एकरूपता आती है वहीं समान प्रकार की सूचनाओं से सभी को समयान्तरगत अवगत कराया जा सकता है। इससे समय और श्रम की बचत भी होती है तथा कार्य निष्पादन अधिक गणात्मक और तीव्रतर होता है। प्रायः जटिल शासकीय संरचना के सभी अंगों तक समान सूचना का प्रेषण इसके द्वारा अत्यल्प समय में सम्भव होता है।

परिपत्र (अर्द्धशासकीय) का प्रारूप

सं0-………..

विभाग-………..

नाम-…………………,

पद-……………..।

अनुभाग-…………..

दि0……….,स्थान………………..

विषय………………….के सन्दर्भ में परिपत्र।

प्रिय श्री महोदय,

उक्त विषय में आपसे आग्रह है कि. ……..

…………………………………………………

2………………………………………

भवन्निष्ठ

संलग्नक- (…………)

1. ……………………

ह0..

(नाम-…….)

सेवा में,

समस्त पद …………..

शा0 पता… ……………..


प्रश्न-15 : परिपत्र भेजते समय किन प्रमुख तथ्यों को ध्यान में रखना आवश्यक है? सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।

(UPPCS Mains General Hindi 2000) परिपत्र प्रारूप Circular letter

उत्तर- परिपत्र (Circular): परिपत्र के माध्यम से एक साथ कई अधिकारियों को समान प्रकार की सूचनाएँ, आदेश, निर्देश, वार्ताबैठक, विचार, विमर्श इत्यादि सन्दर्भित पत्र व्यवहार किया जाता है। इसे भेजते समय निम्न बातों का ध्यान रखना आवश्यक है

  1. परिपत्र में केवल ‘संख्या’ लिखकर ही पत्रांक डाला जाता है।
  2. प्रेषिती के कालम में ‘समस्त’ लिखा जाता है क्योंकि यह एक साथ कई प्रेषितियों को प्रेषित किया जाता है।
  3. इसकी विषय-वस्तु सदैव शासकीय कार्य व्यवहारों के परिप्रेक्ष्य में होती है जिन्हें प्रतिलिपियों के रूप में तैयार कर एक साथ अनेक लोगों को भेज दिया जाता है।
  4. परिपत्र का अपना कोई प्रारूप नहीं होता है, बल्कि यह शासकीय पत्र के किसी रूप में ही भेजा जाता है।
  5. इसकी भाषा शैली और विशेषताएं भी उसी पत्र के सापेक्षिक हो जाती है जिस प्रारूप में यह पत्र प्रेषित किया जाता है।

परिपत्र (शासकीय) का उदाहरण

सं0-12क/2च/2012-13

प्रेषक,

         क.ख.ग.,

          उप सचिव,

          गृह मंत्रालय,

         भारत सरकार।

सेवा में,

            समस्त राज्य सरकारें,

            भारत सरकार।

अनुभाग-1

दि0-26मार्च,2012,नई दिल्ली

विषयः- भारत के खाद्यान्न सम्पन्न राज्यों से खाद्यान्न वसूली के सन्दर्भ में परिपत्र।

महोदय,

                     उक्त विषय में आपको निर्देश हुआ है कि देश में खाद्यान्नों की वर्तमान स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने यह निश्चय का किया है कि अन्न बहुल राज्यों में सरकारों द्वारा अन्न की वसूली की जाए। प्रत्येक राज्य के लिए निर्धारित खाद्यान्नों की मात्रा तथा वसूली के खाद्यान्नों की कीमत के सम्बन्ध में विस्तृत सूचना शीघ्र भेज दी जाएगी।

2. इस सम्बन्ध में कृत कार्यवाही से मंत्रालय को शीघ्र अवगत करायें।

भवदीय

ह0…………….

(क.ख.ग.)

उपसचिव।

प्रतिलिपि समस्त राज्यों के विभिन्न मंत्रालयों एवं संलग्न कार्यालयों को प्रेषित।

आज्ञा से

ह0 …………

(क.ख.ग.)

उपसचिव


प्रश्न-16: अपने क्षेत्र के थानाध्यक्ष को पत्र लिखकर अनुरोध कीजिए कि आपके क्षेत्र में रात की गश्त बढ़ायी जाये ताकि लोग सुरक्षा का अनुभव करें। (लगभग 200 शब्दों में लिखिये।) (पत्र में अपना अथवा अन्य किसी का भी नाम, पता तथा अनुक्रमांक या संकेत न लिखें।) UPPCS सिंचाई विभाग परीक्षा, 2008 परिपत्र प्रारूप Circular letter

उत्तर:

क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाये जाने के संदर्भ में थानाध्यक्ष को पत्र

सेवा में,

           थानाध्यक्ष महोदय,

            प्रयागराज।

विषय – मुहल्ले में रात में गश्त बढ़ाये जाने के संदर्भ में।

महोदय

                            हमारे मुहल्ले में अपराधों में एक अप्रत्याशित वृद्धि नजर आ रही है। पूरा मुहल्ला अजीबोगरीब व्यवस्था का शिकार होता जा रहा है। कोई भी दिन ऐसा नहीं होता जिस दिन नगर के किसी भी क्षेत्र में चोरी, डकैती न हो अथवा हिंसा की वारदात से अछता रहे। एक सम्भ्रान्त व्यक्ति की मर्यादा बची रहे यही उसके लिए बड़ी बात है। इसके विपरीत चारों ओर उचक्के, गण्डे घुमते नजर आ रहे हैं। इन्हें देखने से ऐसा जाहिर होता है कि ये ही देश के प्रथम कोटि के नागरिक हैं। मानो संविधान का इन्हें ही अधिकार मिला हआ है। इस पर पलिस प्रशासन की निष्क्रियता एक प्रश्नचिहन पैदा करती है। आखिर समाज के सभ्य लोग कैसे जीवन-यापन करें, आखिर पुलिस की भूमिका सम्प्रति संदर्भ में क्या होनी चाहिए। यह विचारणीय है ?

             हर नागरिक को सुरक्षित जीवन-यापन का मौलिक अधिकार प्राप्त है। यदि इसी तरह अव्यवस्था बनी रही तो पुलिस प्रशासन से लोगों का विश्वास उठ जायेगा।

              अतः महोदय से निवेदन है कि विषम स्थिति को देखते हए सम्प्रति महल्ले में रात्रिकालीन गश्त बढ़ाने की कृपा करें और इसके लिए विशेष दस्ता नियुक्त किया जाए तथा विशेष हिदायत के तहत इनकी निगरानी की जाए ताकि मुहल्ले में लोगों के बीच सुरक्षा व्यवस्था कायम रह सके।

भवदीय

(अ.ब.स.)

रामप्रिया रोड, प्रयागराज


प्रश्न-17 : नगरों में बढ़ते हुए यातायात सम्बन्धी नियमों के उल्लंघन की समस्या का निवारण करने हेतु एक दैनिक समाचार पत्र के सम्पादक के नाम 200 शब्दों में शिकायती पत्र लिखिए। (पत्र में अपना या अन्य का नाम, पता, अनुक्रमांक आदि संकेतों को न लिखें।) UPPCS सिंचाई विभाग परीक्षा, 2005 

उत्तर –

विषय : नगरों में बढ़ते यातायात सम्बन्धी नियमों के उल्लंघन के संदर्भ में पत्र।

सेवा में,

        सम्पादक महोदय,

         दैनिक समाचार पत्र।

महोदय,

           आपको पत्र के माध्यम से यह अवगत कराना है कि इन दिनों यातायात सम्बन्धी नियमों का विशेष रूप से उल्लंघन होता नजर आ रहा है। आये दिन इससे दुर्घटनाएं बढ़ गई हैं। ट्रैफिक लाइट हरी हुए बगैर कतिपय अराजक तत्त्व गाड़ियों को बेतहाशा सड़कों पर चला रहे हैं उनको पूछने वाला मानो कोई नहीं है। सुबह-सुबह जब बच्चों को विद्यालय छोड़ने की बात आती है तब दुघर्टना के डर से सहमे हुए लोग घर से बाहर निकलते हैं।

           चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस दिखाई नहीं पड़ती। यदि पुलिस चौराहों पर खड़ी होती है तो लगता है, वह स्वतंत्र है। उनकी जब इच्छा होती है, वह अपने कर्तव्यों से विमुख होकर निकल जाती है मानों वह कर्मचारी और अधिकारी दोनों ही है। उनसे कोई पूछने वाला नहीं है। आखिर यह कैसी विडम्बना है कि हम वेतन पूरा ले रहे हैं, कर्तव्य निर्वहन कुछ नहीं।

          जगह-जगह पर जो सिग्नल लाइट लगी हुई है, वह भी ठीक से जलती नहीं। कई लाइट फ्यूज होने के अलावा टूट गई है, जिस पर विभागीय अधिकारियों का कोई ध्यान नहीं जाता।

        अतः श्रीमान जी से निवेदन है कि आए दिन बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण पाने के लिए यह आवश्यक हो गया है कि यातायात के नियमों का सख्ती से पालन करवाया जाए।

स्थान :…………

दिनांक :………………

भवदीय

(अ.ब.स.)


प्रश्न-18 : ‘साक्षरता के महत्त्व’ पर अपने मित्र के नाम 200 शब्दों में एक पत्र लिखिये। (पत्र में अपना अथवा अन्य किसी का भी नाम, पता व अनुक्रमांक न लिखें।)

साक्षरता का महत्त्व

दिनांक – 05-01-2004

सेवा में,

              प्रिय मित्र क.ख.ग.,

              साक्षरता समाज के बीच एक जागृति पैदा करती है। लोगों को जीने का एक तौर तरीका सिखलाती है। यही नहीं अपित अधिकारों के प्रति जागरुक भी करती है। साक्षरता के माध्यम से व्यक्ति सबल बनता है। ध्यातव्य हो कि शिक्षा/ साक्षरता सभ्यता की रीढ़ है। अधुनातन समाज के जीवंत रूप की धुरी शिक्षा को ही कहा जा सकता है। वस्तुतः यह सही है कि हम आज की सभ्यता की चकाचौंध में बहुत पीछे छूट जायेंगे यदि हम साक्षर न हुए तो। हमें इसके माध्यम से अपने अधिकारों को समझने की आवश्यकता है।

यदि भारतीय परम्पराएं और संस्कृति को हमने शिक्षा का आधार बनाया होता तो जल, जंगल और जीवों पर आंख मूंदकर हम अन्याय न किये होते। बिना विचार किये गये कार्य के प्रतिफल के जिम्मेदार हम स्वयं है। ध्यातव्य हो कि एक साक्षर व्यक्ति में सोचने – समझने की क्षमता आ जाती है और उसके कदम विवेक के धरातल से होकर गुजरते हैं।

विभिन्न प्रकार की समस्याएं देश के सामने विकराल रूप से खड़ी है जिसका निदान है- भविष्य को बचाने की कोशिश और उसमें शिक्षा का सही स्थान। वे सभी लोग जो साक्षर हैं, सोचने-समझने की नई अवधारणा के तहत नव सृजन की क्षमता का विकास करते है।

अतः सम्प्रति विषय पर मेरा कहना है कि परिवार के साथ-साथ समाज को साक्षर बनाने में आपकी भूमिका भी महत्त्वपूर्ण होनी चाहिए। यही एक सच्चे नागरिक का कर्तव्य है।

आपका मित्र

(अ.ब.स.)


टिप्पणी लेखन

प्रश्न-1 : उपसचिव, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा ‘सेवा-निवृत्ति की आयु में परिवर्तन’ के विषय में नियंत्रक व महालेखा-परीक्षक, नई दिल्ली को लिखे गए पत्र पर अनुभाग अधिकारी द्वारा लिखी गई टिप्पणी लिखिए।

UKPSC RO/ARO Mains Exam 2016

उत्तर

टिप्पणी

टिप्पणी से आशय कार्यालयी प्रक्रिया में किसी प्रकरण के निस्तारण के सम्बन्ध में लिखे गए नोट से होता है। टिप्पणी लिखने की विधि को टिप्पण लेखन कहा जाता है और टिप्पण लेखन शैली में जो कुछ लिखा जाए उसे टिप्पणी कहते हैं।

उदाहरण

नियन्त्रक व महालेखा-परीक्षक,

वि0प0सं0-1

दि0-12/06/2016

कृपया वि0 प0 संख्या-1, जो उपसचिव वित्त मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रेषित है, का अवलोकन करना चाहें, जिसके माध्यम से उपसचिव द्वारा सेवा-निवृत्ति की आयु में परिवर्तन के सम्बन्ध में विचार प्रस्तुत करने की माँग की गयी है।

महोदय उक्त के सम्बन्ध में सूच्य है कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के आदेश के मुताबिक कर्मचारियों के जुलाई से सितम्बर की अवधि के काम की समीक्षा जनवरी से मार्च के बीच की जाएगी। उक्त सम्बन्ध में यह भी स्पष्ट है कि यदि किसी कर्मचारी के रिटायरमेंट में एक साल का ही वक्त शेष है तो उसे रिटायर नहीं किया जाएगा।

2. महोदय, उक्त से सहमत हो, तो तद्नुसार उपसचिव वित्त मंत्रालय को अवगत कराने हेतु कार्यालय ज्ञाप का आलेख कवर पर प्रस्तुत है, अनुमोदनोपरान्त महोदय आदेशार्थ निर्गत करने हेतु अनुमति देना चाहें।

ह0……………

क. ख. ग.,

अनुभाग अधिकारी।

समीचीन है, तद्नुसार सम्बन्धित को

अवगत करा दिया जाए।

ह0…………

(अ0ब0स0)

नियंत्रक व महालेखा परीक्षक


अनुस्मारक

प्रश्न-1 : अनुस्मारक का अर्थ स्पष्ट करते हुए उसका लिखित प्रारूप बनाइए।

UPPSC RO/ARO Mains Exam 2016

उत्तर : अनुस्मारक पत्र- किसी प्राधिकारी को कार्यवाही विषयक पूर्व पत्र का स्मरण कराने हेतु जो पत्र प्रेषित किया जाता है अनुस्मारक कहलाता है। उल्लेखनीय है कि ऐसे पत्रों का कोई निश्चित प्रारूप नहीं होता है। यह शासन स्तर प्रयुक्त विभिन्न पत्रों यथा- शासकीय पत्र, अर्द्धशासकीय पत्र, परिपत्र, आदेश, ज्ञाप इत्यादि प्रारूप पर प्रेषित होते हैं।

अनुस्मारक -ज्ञाप

जनजातीय कला एवं संस्कृति विभाग

अनुभाग-1

अनु. सं.- 18क/20च/2020-21

दि. – 18 जुलाई, 2020, नयी दिल्ली

कार्यालय ज्ञाप

पूर्व पत्र संख्या-20/12च/2020-2, दिनांक, 21 जनवरी, 2020 का अवलोकन करें, जिसके माध्यम से जनजातीय कला व संस्कृति के प्रोत्साहन विषयक कार्य योजना प्रेषित किए जाने की अपेक्षा की गयी थी, जो अभी तक प्रेषित नहीं की गयी है।

2-तत् सम्बन्ध में नियत प्रारूप पर अपेक्षित संतति यथा शीघ्र प्रेषित करने का कष्ट करें।

भवदीय

ह0………..

(य.र.ल.)

निदेशक।

सेवा में,

क.ख.ग.,

प्रभारी अधिकारी,

कला एवं संस्कृति विभाग,

लखनऊ।

THE END

 

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